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"गुरु वही है जो गोविंद से मिलने का मार्ग बताए।"
परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में मोतीझील ग्राउंड, कानपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
महाराज श्री ने बताया कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान की भक्ति जरूर करनी चाहिए क्योँकि भक्ति से ही मनुष्य का जीवन सदा के लिए सुधर सकता है। उसके सभी पाप धुल जाते है। हम लोग ही बहुत ही भाग्यवान है क्योंकि हमे सब तरह के अंगों से भगवान ने संपन्न किया हुआ है।
भगवान ने हमको हाथ, पैर, आँख, नाक, दिमाग सभी कुछ दिया हुआ है। मेरे ठाकुर जी ने हमको इतनी सूंदर सी जिंदगी दी है। तो हमको उनके इस वरदान को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। इस मानव योनि को प्राप्त करने के बाद भी अगर मानव मेरे प्रभु को याद न करे तो हमसे बड़ा आत्मघाती या पापी इस दुनिया में और कोई नहीं है।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान ने हर व्यक्ति को अपनी एक अलग ही समझ दी है। उसी के अनुसार ही हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार ही हर कार्य को करता है। कई अपनी समझ से अपने हर कार्य को भगवान की मर्जी समझकर ही करते है और सदा ही स्वच्छ मन से कार्य को करते है ताकि उनसे कोई भी गलती न हो और कुछ लोग अपने गंदे विचारो से ही कार्य को करते है और उन्ही में सदैव लिप्त रहते है। वो अच्छे और बुरे का फर्क नहीं समझते है।
हमको तो सदा ही अच्छे और बुरे का फर्क लेकर ही भगवान की भक्ति को करते रहना चाहिए। क्योँकि उसी के अनुसार ही हम अपने सभी कार्यों को कर सकते है। हमको तो सदैव ही अच्छे कार्य ही करने चाहिए और बुरे कार्यों से सदा के लिए ही दूर रहना चाहिए। तभी हमारा इस संसार में सही रूप से गुजारा हो सकता है। भगवान भी उन्ही का साथ देते है जो सदा कर्मों में लिप्त रहते है। जो लोग सदा ही बुरे कार्य करते है उनसे तो भगवान सदा ही दूरी बनाये रखते है।
महाराज श्री ने कहा कि देवता भी आपके भाग्य को देखकर जलते होंगे। वो सोचते होंगे कि जो भाग्य मानव ने पाया है वो भाग्य हमने क्यों नहीं पाया। कार्तिक मास में हमको श्रीमद भागवत कथा क्योँ नहीं सुनने को मिलती है। इसी मानव को ही क्योँ सुनने को मिलती है वो भी कार्तिक मास के इस पवित्र महीने में ही। इसलिए ही हे मानव हम सभी देवता आपको बारम्बार नमन करते है। क्योँकि यह भागवत कथा ही इस मानव को मोक्ष रुपी वरदान करती है।
महाराज श्री ने आगे कहा की पहले हम सब को भगवान की भक्ति करने पर ही जोर दिया है। महाराज श्री ने हमको बताया कि प्रभु भक्ति से ही हम सब के पाप आसानी से धुल जाते है। क्योँकि आज के इस कलयुग में सभी अपने अपने काम करने में ही लगा रहता है। उसको भगवान की भक्ति करने का भी समय नहीं रहता है। लेकिन अपने जीवन को सही ढंग से जीने के लिए और अपने जीवन की सभी समस्याओं को दूर करने के लिए हमको भगवान की पूजा करनी चाहिए।
भगवान की पूजा करने के लिए सबसे पहले तो हमारा मन स्वच्छ और साफ़ होना चाहिए। क्योँकि साफ़ और सवच्छ मन में ही भगवान का वास होता है। जब हमारा मन साफ होगा तो तभी हमारे मन में दूसरों के लिए अच्छे विचार आएंगे। जब हम दूसरों से प्यार करेंगे तो स्वयं भगवान भी हमसब से प्रेम करेंगे। और हमारे जीवन में आने वाली सभी समस्याओं को दूर कर देंगे। प्रभु भक्ति से ही हम सब का हर तरह से कल्याण हो सकता है।
इसलिए तो हम सबको कभी न कभी भागवत कथा का श्रावण करना चाहिए। भागवत कथा हमको इंसान बनाती है। भगवात कथा ही हम सब को सही मायने में जीना सिखाती है। यहाँ पर महाराज श्री ने बताया कि यदि हम सात दिन की भागवत कथा को सुनेंगे तो अवश्य ही हमको इन सात दिनों में बहुत कुछ ऐसा सिखने को मिलेगा जो हम सब के लिए लाभकारी होगा और जिसके बारे में कभी भी हमने सुना ही नहीं होगा।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान त्रिलोकीनाथ जी की कृपा से ही हम सब को यह मानव जीवन प्राप्त होता है। उन्ही की कृपा से ही हम सब इस भागवत कथा को सुनते है। कहते है कि अगर मानव जीवन प्राप्त करने के बाद यदि हमने भगवान की भक्ति नहीं की ,अगर जीव ने दानपुण्य नहीं किया,अगर जीव सुरमा नहीं है ,अगर जीव भक्त है है ,अगर जीव तपस्वी नहीं है ,ऐसे व्यक्ति को मानव कहना बिलकुल ही गलत है। ऐसा मनुष्य तो केवल माँ का मलमूत्र ही है। इसके आलावा और कुछ भी नहीं होता है।
उसे तो केवल माँ का मलमूत्र ही कहना उचित होता है। उसे तो मानवों की शृंखला में रखना ही गलत होता है। जिसने मानव जीवन पा कर तपस्या नहीं की ,दानपुण्य नहीं किया ,सुरमा नहीं हुआ ,भगवान का भक्त नहीं हुआ, ऐसे मानव जीवन को पाकर तो सिर्फ लाभ ही क्या हुआ। ना जाने आपके कितने जन्मों के पुण्य के फल के दवारा ही आपको इस श्रीमद भागवत कथा को सुनने का सौभाग्य आपको प्राप्त हुआ है
महाराज श्री ने कहा की मैं जब भी विदेश जाता हूँ तो वहा भक्त ३००-४०० किलोमीटर से कथा सुनाने आते हैं और उसके बाद प्रत्येक दिन अपने काम पर भी जाते हैं। इसी को तो टाइम मैनेजमेंट कहते हैं। हमे किसी की शादी में जाना हो तो हम अपने काम से, अपने ऑफिस से छुट्टियां ले लेते हैं लेकिन क्या कभी आपने भागवत कथा सुनाने के लिए छुट्टी ली है क्या? हमे अपने ठाकुर जी से मिलने के लिए भी छुट्टी लेनी चाहिए।
इसके बाद महाराज श्री ने कहा की आपके जीवन की सबसे ज्यादा चिंता आपके माता-पिता को होती है क्योंकि उन्हें यही चिंता सताती रहती है की मेरा बच्चा भविष्य में क्या करेगा। आपके माता पिता को आपके इस जीवन की इतनी चिंता है तो जो सबका परमपिता परमेश्वर है उसको कितनी चिंता होगी आपके जीवन की। इतना ही नहीं ठाकुर जी को आपके इसी जीवन की नहीं अपितु आपके अनंत जीवन की चिंता होती है तभी तो उसने आपको इससे मुक्त करने के लिए आपको मानव जीवन दिया है। लेकिन हम उसकी भक्ति न करके फिरसे इस जीवन को व्यर्थ कर देते हैं।
गुरु का दायित्व क्या है? गुरु के गुण क्या है? अभी तक आप शिष्य के गुण जानते थे आज गुरु के गुण भी जानिये। गुरु के 3 दायित्व है। गुरु वही है जो तीन काम करा सके
गुरु वही जो गोविन्द मिलावे।
गुरु वही जो संत सिवावे
गुरु वही जो विपिन बसावे
ये तीन काम जो करा दे वही सच्चा गुरु है।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।





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