महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसी दास बाबा जिन्होंने मानव जीवन के लिए लिखा कि यह जीवन एक यात्रा हैं आने वाले इतिहास में जब भी कोई चर्चा होगी हमारे नाम की तो इसमें लिखा जायेगा कि इसमें किसकी यात्रा अच्छी थी और किसकी यात्रा बुरी। अब तक ता इतिहास उठाइये चाहे राम-रावण का, चाहे कृष्ण-कंस का और चाहे पह्रलाद-हिरणाकश्यप की हो। कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हे हम आज भी याद करते हैं। और कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हे हम कभी यद् नहीं करना चाहते हैं। जिन्हे हम सिर्फ जलाना चाहते हैं। जीवन की यात्रा के बारे में बताते हुए महराज श्री ने कहा कि यही हैं " जीवन की यात्रा" दुर्लभो मानषु जन्मः अथार्त कि मानब शरीर दुर्लभ हैं पर इस शरीर का एक पल का भरोसा नहीं हैं। एक क्षण का भी भरोसा नहीं हैं की में कान्हा से चला हु और कँहा पर पहुंच जाऊं, इस यात्रा को कैसे पूरा किया जाये कैसे निभाया जाये ये सारी जिम्मेदारी हमारी हैं। जीवन आपका हैं किसी और का नहीं जिम्मेदारी जीवन के प्रति आपकी हैं किसी और की नहीं हैं, तुम्हारे निर्णय तुम्हारे जीवन को बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं ज...