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आज गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर ठाकुर प्रियाकांत जू मंदिर, शांति सेवा धाम वृंदावन में गुरु पूजन करते हुए सभी शिष्य परिवार। || राधे राधे बोलना पड़ेगा ||

"मेरा भारत मेरा स्वाभिमान" अभियान

पूज्य महाराज श्री के "मेरा भारत मेरा स्वाभिमान" अभियान से किस प्रकार से जुड़े और क्या है इस अभियान का उद्देश्य, यह जानने के लिए जरूर देखें यह वीडियो इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें, ताकी औरों को भी यह जानकारी प्राप्त हो सके। "मेरा भारत - मेरा स्वाभिमान" अभियान से जुड़ने के लिए अपने मोबाइल से मिस्ड कॉल करें 1800-1020-519 या फिर  http://www.vssct.com/form.php  पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 03 जून से 10 जून तक प्रतिदिन राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का खेल मैदान, हॉस्पिटल चौराहा के पास, खाटूश्याम जी में 108 श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तृतीय दिवस पर महाराज श्री ने शुकदेव जी के जन्म का वृतांत विस्तार से वर्णन किया।

भागवत कथा के तृतीय दिवस की शुरुआत, भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। कथा से पूर्व बजरंग दल खाटूश्याम के सदस्यों द्वारा महाराज श्री को पगड़ी पहानकर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।  पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि संस्कृत, संस्कृति और संस्कार इस देश की वो धरोहर है जिसकी वजह से हमारे देश का मान सम्मान सिर्फ भूमंडल पर ही नहीं अपितु इस की वजह से भारत जैसे पुनित देश का डंका स्वर्ग में भी बजता है। मेकाले जब भारत आया तो उसने अपने सदन में एक बात कही थी कि मैने भारत के हर एक कोने को जा जाकर देखा है और इस भारत को हम गुलाम बनाने के लायक नहीं है। यह इतना संपन्न देश है कि मुझे इस देश में एक भी भिखारी नजर नहीं आया। इस देश की सबसे बड़ी सपत्ति इसके संस्कार है, यहां एक से एक आदर्श व्यक्तित्व रहता है। मेकाले उस देश की बात कर रहा है जहां आज एक भी लड़की सुरक्षित नहीं है। मेकाले कहता था यह देश तब तक गुलाम नहीं बन सकता जब तक हम इसकी संस्कृति, संस्कृत और संस्कार को खत्म नहीं कर देते। आजकल अगर कहीं हम अगर दो अंग्रेजी बोलने वालों क...
कथा के पहले दिन सर्वप्रथम सुबह श्री खाटू श्याम जी मंदिर से कथा स्थल तक कलश यात्रा निकाली जिसमें सैकड़ों माताओं बहनों ने कलश उठाया। कथा से पूर्व महाराज श्री ने सभी 108 यजमान ब्राह्मणों के साथ पूजा अर्चना की जिसके बाद दोपहर 12:30 बजे महाराज जी के साथ श्री पवन जी, पुजारी अध्यक्ष, श्री श्याम सुंदर शर्मा जी, प्रधानाचार्य, श्री पप्पू शर्मा जी ने दीप प्रज्जवलित कर 108 श्रीमद्भागवत कथा की शुरूआत की। यजमानों द्वारा महाराज श्री को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। भागवत कथा के प्रथम दिवस की शुरुआत दीप प्रज्जवलन, भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि हमेशा मीठी बाते सुनिए अगर कटु वाणी सुनोगे तो तुम्हारा ह्रदय जहरीला हो जाएगा और मधुर वाणी सुनोगे तो आपका ह्रदय रस युक्त, स्वस्थ, निर्मल पवित्र हो जाएगा। महाराज जी ने कहा कि आजकल मां बाप की जिम्मेदारी कम होती जा रही है क्योंकि वो सोचते हैं कि अध्यापक सबकुछ सीखा देंगे। उन्होंने कहा कि बच्चे आपके हैं टीचर के नहीं , अपने बच्चों को सही राह पर ले जाने के लिए मा...

भगवान शिव की नगरी काशी में पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 18 मई से 24 मई 2018 तक भारत माता मंदिर, विद्यापीठ रोड, कैंट, वाराणसी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा में बताया की जिस व्यक्ति की मृत्यु सातवें दिन हो उसको क्या करना चाहिए ? इस वृतांत का विस्तार से वर्णन किया।

भागवत कथा के तीसरे दिन की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा कि जब आप कुछ अच्छा करने जाते हो तो कुछ ना कुछ सवाल आपसे पुछे जरूर जाते हैं, क्यों जा रहे हो ? यही कर लेतें ? लेकिन याद रखना अच्छे कार्य के लिए कभी सोचना नहीं चाहिए। महाराज जी ने एक शायरी करते हुए कहा कि  जिन्दगी ने कई सवालात कर डाले, वक्त ने मेरे हालात बदल डाले। मैं तो आज भी वहीं हूं जो पहले था, बस मेरे लिए लोगों ने अपने ख्यालात बदल डाले।। इसलिए जब भी कहीं जाओ अच्छा काम करने के लिए और उसके बावजूद भी लोग आपसे सवाल पूछे तो फिक्र मत करो बस चलते जाओ। उन्होंने अभी विचार बदले हैं, फिर आकर आपके साथ मिल जाएंगे लेकिन अच्छे काम के लिए आप अपने विचार मत बदलिए। आप अच्छे कार्य करते रहोगे तो गोविंद आपके साथ में रहेंगे। महाराज जी ने कहा कि हम सब की जिंदगी सात दिन की है। पता नहीं कब बुलावा आ जाए और हमें जाना पड़े, इसलिए जीवन में किसी को दुख मत दो। जो दुसरों के दुख को समझता है वो मानव है और जो दुसरे के दुख को बढ़ा दे वही र...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -6 || || VRINDAVAN ||

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -6 || || VRINDAVAN ||

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 22 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक शांति सेवा धाम, वृन्दावन में आयोजित होली महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत 108 श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस पर महाराज श्री ने भागवत में आज पूतना वध और श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुन्दर वृतांत विस्तार से वर्णन किया और सुन्दर भजनो का भक्तों को श्रवण कराया।

मन को साफ़ रखो, मर्यादा का पालन करों तो वृंदावन मे गोविंद की कृपा का अनुभव होगा। पूज्य महाराज श्री ने कथा का प्रारम्भ करते हुए कहा की हम लोग ही बहुत ही भाग्यवान है क्योंकि हमे सब तरह के अंगों से भगवान ने संपन्न किया हुआ है। भगवान ने हमको हाथ, पैर, आँख, नाक, दिमाग सभी कुछ दिया हुआ है। मेरे ठाकुर जी ने हमको इतनी सुन्दर जिंदगी दी है। तो हमको उनके इस वरदान को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। इस मानव योनि को प्राप्त करने के बाद भी अगर मानव मेरे प्रभु को याद न करे तो हमसे बड़ा आत्मघाती या पापी इस दुनिया में और कोई नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि भगवान ने हर व्यक्ति को अपनी एक अलग ही समझ दी है। उसी के अनुसार ही हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार ही हर कार्य को करता है। कई अपनी समझ से अपने हर कार्य को भगवान की इच्छा मानकर ही करते है और सदा ही स्वच्छ मन से कार्य को करते है ताकि उनसे कोई भी गलती न हो और कुछ लोग अपने गंदे विचारो से ही कार्य को करते है और उन्ही में सदैव लिप्त रहते है। वो अच्छे और बुरे का फर्क नहीं समझते है। हमको तो सदा ही अच्छे और बुरे का फर्क लेकर ही भगवान की भक्ति को करते ...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -4 || || VRINDAVAN

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -4 || || VRINDAVAN

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 22 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक शांति सेवा धाम, वृन्दावन में आयोजित होली महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत 108 श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर महाराज श्री ने भागवत में वामन अवतार, अजामिल कथा,भगवान् श्री कृष्ण का जन्मोत्सव आदि का वृतांत विस्तार से वर्णन किया और सुन्दर भजनो का भक्तों को श्रवण कराया।

" प्रभु की विशेष कृपा होती है तब पापों का नाश करने के लिए भागवत कथा प्राप्त होती है। " पूज्य महाराज श्री ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा क ी प्रभु की असीम अनुकम्पा का दर्शन यह है की हम सभी श्री वृन्दावन धाम में है और ये ही नहीं प्रियकांत जू की कथा उन्ही के प्रांगड़ में बैठ कर सुनने का सौभाग्य आप सभी भक्तो को प्राप्त हो रहा है। निश्चित ही कुछ पाप ऐसे होते है जो हमे अच्छे कर्मो से , भगवान की कथा से दूर करते है। और कुछ विशेष कृपा जब प्रभु की होती है तो हमारे पापो को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है और वह भागवत कथा के माध्यम से होता है चुतर्थ दिवस की कथा का वृतांत में महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण के प्राक्ट्य की कथा सुनाई मथुरा नगरी में राजा उग्रसेन जिनका एक पुत्र था कंस जो अपनी बहन देवकी को जब विवाह के बाद विदा करने जा रहे थे तो रस्ते में आकाशवाणी हुई की हे कंस तू जिस बहन को इतने आदर के साथ विदा कर रहा है उसीका आठवाँ पुत्र तेरा काल होगा इतना सुनते ही कंस ने देवकी के केश पकडे और रथ से नीचे उतर लिया। और देवकी से बोला की जब तू ही नहीं होगी तो तेरा पुत्र कैसे...

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 14 से 20 फरवरी 2018 तक हुड्डा ग्राउंड न. 1, करनाल (हरियाणा) में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के सप्तम दिवस पर महाराज श्री ने कंस वध, उद्धव चरित्र एवं भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणि जी के विवाह का सुन्दर वर्णन सभी भक्तों को सुनाया।

" अपने कर्मो को हमेशा सही रखना तो ईश्वर सदैव आपका हाथ थामे रखेगा।" राजा परीक्षित को की भागवत का ज्ञान सुनने के वो स्वयं अपनी मृत्यु का इंतज़ार कर रहे है। उनको अब काल का यानि तक्षक का कोई भय नहीं रहा। जिसने जन्म लिया है वो मृत्यु को प्राप्त होगा ही। प्रत्येक जीव के जन्म से पहले ही उसकी मृत्यु का समय , स्थान और कारन ये निश्चित हो जाता है। कथा के क्रम को आगे बढ़ाया और बताया की रुक्मणि और भगवान् श्याम सुन्दर का विवाह हुआ और उनका प्रथम पुत्र को जन्म होते ही एक संभरासुर नामक राक्षस उठा ले गया क्योकि उसको पता था की श्री कृष्ण का प्रथम पुत्र उसकी मृत्यु का कारन होगा। तो वो प्रद्युम्न समुद्र में फेक देता है वहां एक मछली उसको निगल जाती है और वो फिर संभरासुर की रसोई में ही पहुँच जाती है और उसका पालन पोषण काम देव की पत्नी ने स्वयं माँ की तरह कर उसको बड़ा किया। प्रद्युम्न कामदेव का जी जन्म है और ये पहली पत्नी थी जिसने अपने पति को माँ की तरह पला। जब प्रद्युम्न बड़े हुए तो संभरासुर का वध कर के द्वारिका को पत्नी सहित प्रस्थान किया। महाराज श्री ने आगे कहा कि पुराणों की कथ...

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 14 से 20 फरवरी 2018 तक हुड्डा ग्राउंड न. 1, करनाल (हरियाणा) में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर महाराज श्री ने कंस वध , उद्धव चरित्र एवं भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणि जी के विवाह का सुन्दर वर्णन सभी भक्तों को सुनाया।

महाराज जी ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा की आजकल डॉक्टर पैदा होते है, इंजिनियर पैदा होते है लेकिन देशभक्त पैदा नहीं होते। उन्होंने कहा की जो देशभक्त पैदा होते भी है झंडा लेकर चलते भी है तो लोग उन्हे गोली मार देते हैं। महाराज श्री ने कहा की मैं उन माताओ को प्रणाम करता हूँ, जो देश के लिए बलिदान देने वाले पुत्रों को जन्म देती हैं। महाराज जी ने कहा की सात दिन लगातार जो भी व्यक्ति कथा का श्रवण करता है उसके जीवन में बदलाव जरुर आते हैं इस बात की गारंटी है। महाराज जी ने युवाओं से कहा कि कथा का श्रवण जरुर करें क्योंकि जो आप अभी सीखेंगे वहीं आपके आने वाली पीढ़ी में जाएगा और कोई भी व्यक्ति ये नहीं चाहेगा की उसका बेटा धर्मात्मा ना बने। सरकार कहती है की बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओं लेकिन मैं कहता हूँ की बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओं लेकिन पहले बेटों का संस्कारी बनाओं। महाराज ने कहा की माता पिता को अपने बच्चों को चरित्र का उपदेश देना चाहिए। "बिना साधना के प्रभु का सानिध्य नहीं।" श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि बिना साधना के भगवान का सानिध्य ...

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 14 से 20 फरवरी 2018 तक हुड्डा ग्राउंड न. 1, करनाल (हरियाणा) में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा में वामन अवतार एवं श्री कृष्ण जन्मोत्सव का सुन्दर वर्णन विस्तार से किया।

पूज्य महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए बताया कि वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारो में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार था। जिसमें भगवान विष्णु ने एक बौने के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। वामन अवतार की कहानी असुर राजा महाबली से प्रारम्भ होती है। महाबली प्रहलाद का पौत्र और विरोचना का पुत्र था। महाबली एक महान शासक था जिसे उसकी प्रजा बहुत स्नेह करती थी। उसके राज्य में प्रजा बहुत खुश और समृद्ध थी। उसको उसके पितामह प्रहलाद और गुरु शुक्राचार्य ने वेदों का ज्ञान दिया था। समुद्रमंथन के दौरान जब देवता अमृत ले जा रहे थे तब इंद्रदेव ने बलि को मार दिया था जिसको शुक्राचार्य ने पुनः अपन मन्त्रो से जीवित कर दिया था। महाबली ने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी जिसके फलस्वरूप भगवान ब्रह्मा ने प्रकट होकर वरदान मांगने को कहा। महाबली भगवान ब्रह्मा के आगे नतमस्तक होकर बोला “प्रभु, मै इस संसार को दिखाना चाहता हूँ कि असुर अच्छे भी होते हैं। मुझे इंद्र के बराबर शक्ति चाहिए और मुझे युद्ध में कोई पराजित ना कर सके।" भगवान ब्रह्मा ने इन शक्तियों के ...

करनाल के हुड्डा ग्राउंड नंबर 1 सुपर मॉल, नजदीक हुड्डा कार्यालय, में विश्व शांति सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में कथा वाचक पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। पंचम दिवस पर महाराज श्री ने पूतना उद्धार एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

भागवत कथा के पांचवे दिन की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई।आज कथा में मुख्य अतिथि के तौर पर लिबर्टी के एम्.डी श्रीमान शम्मी बंसल जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पंचम दिवस की कथा का रसपान किया। देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा की हम अगर संस्कारी बनेंगे तो हमारे बच्चे भी संस्कारी बनेंगे और अगर हम अपने धर्म का सम्मान करेंगे तो आने वाली पीढ़ी भी धर्म का सम्मान करेगी। महाराज श्री ने बताया की अगर धर्मं के ऊपर कोई उपकार करना चाहते हो तो अपनी आने वाली पीढ़ी को ऐसे संस्कार दे कर जाए की वो आपके इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारे घरो में रोजाना पूजा होती रहे भगवान् की आरती होती रहे भगवान् को भोग लगता रहें, क्यूंकि घर केवल ईंट-पत्थर का नहीं होता हैं। घर को घर बनाने में हमारे परिवार का बड़ा हाथ होता हैं घर- भवन वही होते हैं जहाँ संतो का आना- जाना हो और भजन सिमरन होता रहें। महाराज जी ने बताया की हमें लड़को को अच्छे संस्कार देने चाहिए क्यूंकि आज के समय में लड़को से ज्यादा फ़िक्र अपने माँ बाप की "लड़की" को होती हैं। एक कहानी ...

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 14 से 20 फरवरी 2018 तक हुड्डा ग्राउंड न. 1, करनाल (हरियाणा) में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर महाराज श्री ने भागवत में भगवान शिव द्वारा सुनाई गई अमर कथा का विस्तार से वर्णन किया।

“गीता ना सिर्फ हमे गोविंद का बनाती है बल्कि हमें जीवन जीना सीखाती है" महाराज श्री ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा की संतो के आशिर्वाद रुपी वृक्ष के नीचे जो विराजमान हो जाते हैं वो देश, जाति, धर्म भूलकर एक ही परिवार के नजर आते हैं और कृष्ण की कथा और संतो के मुख से निकली बाते भगवान के दर्शन तो कराते ही है साथ ही इस लायक बना देते ही की परमात्मा भी उस जीव के बिना फिर रह नहीं पाते हैं।गीता ना सिर्फ हमे गोविंद का बनाती है बल्कि हमें जीवन जीना सीखाती है। उन्होंने कहा की गीता ना सिर्फ हिंदूओं का ग्रंथ है बल्कि गीता पूरे मानव जाती का ग्रंथ है जिसने गीता को अपना लिया है वो पूरे जीवन में विजयी हो गया है। भागवत में कहा गया है जो फल हमें कल्प वृक्ष से नहीं मिल सकता वो फल हमें गुरु कृपा से मिल सकता है। अगर परमात्मा का साक्षात्कार करना है तो उसके लिए गुरू कृपा आवश्यक है। संत वहीं होता है जो गोविंद से मिलाता है। जितने भी हमारे ग्रंथ है वो हमें भगवान से मिलाते हैं। आपका विश्वास उन संतों में होना चाहिए वो आपको हरि से मिलाए।भागवत का फल इतना है की सात दिनों तक सच्चे मन से इसका श्रवण ...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day - 2 || KARNAL HARYANA ||

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day - 2 || KARNAL HARYANA ||

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -6 || UNA ||

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -6 || UNA ||

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 06 फरवरी से 12 फरवरी 2018 तक ऊना (हिमाचल) में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस पर महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

महाराज जी ने कहा की भगवान के धरती पर भक्तों के हित के लिए, भक्तों को आनन्द देने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा की भगवानों को भी कथा सुनने को नहीं मिली लेकिन मृत्यु लोक में आपको कथा सुनने को मिल गई वो इसलिए मिल गई क्योंकि भगवान से हमें उपयुक्त समझा है, जिसे प्रभु उपयुक्त समझते हैं उसे अपने आप से पहले अपनी कथा प्रदान करते हैं। महाराज जी ने कहा की जो लोग कहते है हम भगवान से मिलना चाहते हैं वो ये जान ले की भगवान को शुद्ध ह्रदय पसंद है, जब तुम्हारा दिल शुद्ध होगा तब भगवान के दर्शन स्वयं ही हो जाएंगे।जो लोग कपट कर के भगवान के पास जाते हैं भगवान उनकी तरह देखते ही नहीं है, भगवान की देखने वालों की लाइन लगी पड़ी है किस्मत वाले तो वो है जिनको भगवान देखता है, जिनके आने का इंतजार भगवान को रहता है। अब आप खुद तय करिए की आपको क्या बनना है आपको भगवान को देखना है या भगवान आपको देखे। महाराज जी ने कथा का वृतांत बताते हुए पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए कहा की पुतना कंस द्वारा भेजी गई एक राक्षसी थी और श्रीकृष्ण को स्तनपान के जरिए विष देकर मार देना चाहती थी। पुतना कृष्ण को विषपा...