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पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 4 से 10 जनवरी तक, सी. डी. पार्क, साल्ट लेक, कोलकाता में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

"देश और धर्म की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है।" पूज्य महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए बताया कि वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारो में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार था। जिसमें भगवान विष्णु ने एक बौने के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। वामन अवतार की कहानी असुर राजा महाबली से प्रारम्भ होती है। महाबली प्रहलाद का पौत्र और विरोचना का पुत्र था। महाबली एक महान शासक था जिसे उसकी प्रजा बहुत स्नेह करती थी। उसके राज्य में प्रजा बहुत खुश और समृद्ध थी। उसको उसके पितामह प्रहलाद और गुरु शुक्राचार्य ने वेदों का ज्ञान दिया था। समुद्रमंथन के दौरान जब देवता अमृत ले जा रहे थे तब इंद्रदेव ने बाली को मार दिया था जिसको शुक्राचार्य ने पुनः अपन मन्त्रो से जीवित कर दिया था। महाबली ने भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की थी जिसके फलस्वरूप भगवान ब्रह्मा ने प्रकट होकर वरदान मांगने को कहा। बाली भगवान ब्रह्मा के आगे नतमस्तक होकर बोला “प्रभु, मै इस संसार को दिखाना चाहता हूँ कि असुर अच्छे भी होते हैं। मुझे इंद्र के बराबर शक्ति चाहिए और मुझे युद्ध में कोई ...

शराब हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है इससे क्या नुक्सान है आप सोच भी नहीं सकते

शराब हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है इससे क्या नुक्सान है आप सोच भी नहीं सकते || SHRI DEVKINANDAN THAKUR JI MAHARAJ

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 19 से 26 नवंबर तक 2017 महादेव स्टेट कामधेनु मैदान , कृष्णा कुंज सोसाइटी के सामने, गणेश चौक नई RTO रोड वस्त्राल, अहमदाबाद में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के तृतीय दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

महाराज श्री ने कहा, भगवान साकार के लिए साकार रूप में है और निराकार के लिए निराकार स्वरुप है। आप उसको किस रूप में भजे ये आपके ऊपर है। भगवान तो आपको उस ही रूप में प्राप्त होंगे। परन्तु आज के बच्चे अच्छी बात नहीं सीखें गे, क्योंकि हमारे बड़े हमें जो सिखाते है हम उस पर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन जो हमारे दोस्त हमें सिखाते है वो हम पूर्ण रूप से हम अपने जीवन में उतार लेते है। मैं एक बात बार-बार कहता हूँ की आपके माँ -बाप कभी आपका बुरा नहीं चाहते। दोस्त आपको गलत बात सिखाते है, पीना सिखाते है पर हमारे माँ - बाप हमे वो सिखाते है जिससे हमारा कल्याण हो। शुकदेव जी महाराज जो सबसे बड़े वैरागी है चूड़ामणि है उनसे राजा परीक्षित जी ने प्रश्न किया कि हे गुरुदेव जो व्यक्ति सातवें दिन मरने वाला हो उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए? किसका स्मरण करना चाहिए और किसका परित्याग करना चाहिए? कृपा कर मुझे बताइये... इस बात से एक प्रसंग याद आ रहा है की जब यक्ष ने धर्मराज से प्रश्न किया तो उनमें से एक प्रश्न यह भी था की संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? तो धर्मराज ने उत्तर दिया की लोग अपने ही हाथो अपने ही ल...

क्या आप जानते है ये ब्रज की गोपियां कौन है जो कृष्ण के प्रेम में पागल है

क्या आप जानते है ये ब्रज की गोपियां कौन है जो कृष्ण के प्रेम में पागल है
पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में ९ से १५ नवंबर तक 2017 कटरा बाजार सीतामढ़ी थाना कोइरुन तहसील ज्ञानपुर, भदोही में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के प्रथम दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। सर्वप्रथम महाराज श्री ने विश्व शांति के लिए ठाकुर जी से प्रार्थना की और उसके बाद भागवत कथा में प्रवेश किया। महाराज श्री ने बताया की भागवत में आने से हमे सभी तीर्थो का पुण्य प्राप्त हो जाता है। क्योकि जहाँ भागवत कथा होती है वहां सभी पवित्र नदिया , सभी देवता , सारे तीर्थ वास करते है। और कथा पंडाल में आकर भागवत सुनने मात्रा से ही हमे सभी तीर्थो का पुण्य लाभ हमको प्राप्त हो जाता है। पूर्व के युगो में जो हजारों वर्षो की तपस्या करके भगवान की प्राप्ति होती थी। परन्तु कलियुग में केवल नाम संकीर्तन व कथा श्रवण मात्र से ही मनुष्य को ईश्वर की प्राप्ति हो जाती है। प्रत्येक पुराण में कलियुग के प्राणियों के लिए चिंता वयक्त की, कि किस प्रकार कलयुगी मनुष्य का उद्धार हो कारण बस इतना है की आज का मानव धर्म को सर्वोपरि नहीं धन को सर्वोपरि मानता है। पूर्व काल में एक नगर में...

पूर्णिमा के पावन पर्व पर लाइव संकीर्तन प्रियाकांत जू मन्दिर शांति सेवा धाम वृन्दावन 04/11/2017

सिर्फ सूर्य और चन्द्र पर ही क्यों ग्रहण लगते है

सिर्फ सूर्य और चन्द्र पर ही क्यों ग्रहण लगते है || SHRI DEVKINANDAN THAKUR JI MAHARAJ If You Like The Video Don't Forget To Share With Others & Also Share Your Views.

SHRIMAD BHAGWAT KATHA - KANPUR - DAY 6

SHRIMAD BHAGWAT KATHA - KANPUR - DAY 6 || SHRI DEVKINANDAN THAKUR JI MAHARAJ

SHRIMAD BHAGWAT KATHA - KANPUR - DAY 7 || ये हैं मृत्यु का रहस्य.....

SHRIMAD BHAGWAT KATHA - KANPUR - DAY 7 || ये हैं मृत्यु का रहस्य..... || SHRI DEVKINANDAN THAKUR JI MAHARAJ
परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में मोतीझील ग्राउंड, कानपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। यहां महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा कि सबसे पहले आप भारतीय संस्कृति, वैदिक संस्कृति को समझिये, तब यह निर्णय लीजिये की आप अपने बच्चों को क्या बनाना चाहते है? आपका बच्चा मदिरालय जाये या मंदिर जाये, मूवी जाये या सत्संग जाये, स्मोकिंग/ड्रिंकिंग करे या भगवान का चरणामृत पीये, बुढ़ापे में आपको हाथ पकड़ कर घर से निकाल दे या फिर श्रवण कुमार की तरह आपकी सेवा करे। आप अपने बच्चे को ऐसा डॉ. बनाना चाहेंगे जो मुर्दे से भी पैसा कमाए या ऐसा वैध बने जो किसी के पास पैसा न हो तब भी उसका इलाज कर उसकी जान बचाये। आप अपने बच्चे को ऐसा वकील बनायेगे जो खुद पैसा कमाने के लिए अपने क्लाइंट का केस लम्बा चलाये चाहे उसका घर बार बिक क्यों न जाये, या फिर ऐसा की चाहे कुछ भी हो में अपने क्लाइंट को न्याय दिलवाये। क्या आप अपने बेटे-बेटियों को ऐसा इंजनियर बनाना चाहेंगे जो ऐसे पुल का निर्माण करे जिसमे लोगो की...
"गुरु वही है जो गोविंद से मिलने का मार्ग बताए।" परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में मोतीझील ग्राउंड, कानपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। महाराज श्री ने बताया कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान की भक्ति जरूर करनी चाहिए क्योँकि भक्ति से ही मनुष्य का जीवन सदा के लिए सुधर सकता है। उसके सभी पाप धुल जाते है। हम लोग ही बहुत ही भाग्यवान है क्योंकि हमे सब तरह के अंगों से भगवान ने संपन्न किया हुआ है। भगवान ने हमको हाथ, पैर, आँख, नाक, दिमाग सभी कुछ दिया हुआ है। मेरे ठाकुर जी ने हमको इतनी सूंदर सी जिंदगी दी है। तो हमको उनके इस वरदान को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। इस मानव योनि को प्राप्त करने के बाद भी अगर मानव मेरे प्रभु को याद न करे तो हमसे बड़ा आत्मघाती या पापी इस दुनिया में और कोई नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि भगवान ने हर व्यक्ति को अपनी एक अलग ही समझ दी है। उसी के अनुसार ही हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार ही हर कार्य को करता है। कई अपन...