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आज #गुरू_पूर्णिमा महोत्सव के शुभ अवसर पूज्य महाराज श्री ने “मेरा भारत - मेरा स्वाभिमान” अभियान की विधिवत शुरूआत की।

आज  #गुरू_पूर्णिमा  महोत्सव के शुभ अवसर पूज्य महाराज श्री ने “मेरा भारत - मेरा स्वाभिमान” अभियान की विधिवत शुरूआत की, जिसके प्रथम सदस्य ठा. श्रीप्रियाकांत जू भगवान एवं दूसरे सदस्य पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज बने। पूज्य महाराज श्री ने सभी को इस अभियान से जुड़कर देशहित के लिए कार्य के लिए प्रेरित किया। महाराज श्री ने कहा कि जो भी व्यक्ति देशहित के लिए, समाज के लिए, धर्म के लिए कार्य करना चाहता है वो इस अभियान से जुड़े और देश के लिए कार्य करें, धर्म के लिए कार्य करे।  #GuruPurnima2019
कल 14 जुलाई रविवार को शांति सेवा धाम, वृंदावन में पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की जिसमें बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। महाराज श्री सभी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बताया की किस प्रकार से हम सब ने मिलकर धर्म के लिए कार्य करना है, किसी प्रकार से देश की सेवा करनी है एवं समाज के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

Sanskritik Mahotsav Promo ।। Shri Devkinandan Thakur Ji Maharaj

Sanskritik Mahotsav Promo ।। Shri Devkinandan Thakur Ji Maharaj

अंबुबाची महोत्सव धर्मरत्न शांतिदूत पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में 21 जून से 27 जून 2018 तक स्थान – सोनाराम प्लेग्राउण्ड, ए.टी.रोड, भरलुमुख, गुवाहाटी ,असम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा के महात्यम का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

द्वितिय दिवस की शुरुआत करते हुए परम पुज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज जी ने प्रभु श्री कृष्ण का सुंदर भजन श्रवण किया। उन्होंने कहा कि जो मोक्ष चाहने वाले है उनके लिए भागवत सबसे सरल साधन है। मुक्ति मिलना आसान नहीं है, हज़ारों हज़ारों वर्षों तक तप करने के बाद भी मोक्ष सहज प्राप्त नहीं होता। अगर हम कहें कि हमें मुक्ति तप के माध्यम से मिल जाए, किसी और साधन से मिल जाए, तो ये आसान नहीं है, मुक्ति मिली तो है लेकिन आसानी से नहीं। उन्होंने कहा कि भागवत मात्र 7 दिन में मोक्ष देती है, लेकिन ये मुमकिन तब ही है जब हम भागवत को नियम और विधि विधान से सुने, ऐसा करने से आप जो चाहते है वो ही आपको मिलेगा। धन चाहने वालों को धन, संतान चाहने वालों को संतान, पाप नष्ट करना चाहते हो तो पाप नष्ट हो जाऐंगे, पापी से पापी कितना भी बड़ा पापिष्ट क्यूं ना हो वो भागवत कथा सुन ले तो वो निष्पान हो जाता है, ऐसी शक्ति है पवित्र ग्रंथ श्रीमद भागवत कथा में। श्रीमद भागवत कथा प्रत्येक रोग की औषधी है जिसे आप औषधालय भी कह सकते हैं। भगवान श्री कृष्ण गोकुल में विराजमान, उदास सर्वेश श्री राधा ने पूछा आप उदास क...
कथा के पहले दिन सर्वप्रथम सुबह श्री खाटू श्याम जी मंदिर से कथा स्थल तक कलश यात्रा निकाली जिसमें सैकड़ों माताओं बहनों ने कलश उठाया। कथा से पूर्व महाराज श्री ने सभी 108 यजमान ब्राह्मणों के साथ पूजा अर्चना की जिसके बाद दोपहर 12:30 बजे महाराज जी के साथ श्री पवन जी, पुजारी अध्यक्ष, श्री श्याम सुंदर शर्मा जी, प्रधानाचार्य, श्री पप्पू शर्मा जी ने दीप प्रज्जवलित कर 108 श्रीमद्भागवत कथा की शुरूआत की। यजमानों द्वारा महाराज श्री को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। भागवत कथा के प्रथम दिवस की शुरुआत दीप प्रज्जवलन, भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि हमेशा मीठी बाते सुनिए अगर कटु वाणी सुनोगे तो तुम्हारा ह्रदय जहरीला हो जाएगा और मधुर वाणी सुनोगे तो आपका ह्रदय रस युक्त, स्वस्थ, निर्मल पवित्र हो जाएगा। महाराज जी ने कहा कि आजकल मां बाप की जिम्मेदारी कम होती जा रही है क्योंकि वो सोचते हैं कि अध्यापक सबकुछ सीखा देंगे। उन्होंने कहा कि बच्चे आपके हैं टीचर के नहीं , अपने बच्चों को सही राह पर ले जाने के लिए मा...

भगवान शिव की नगरी काशी में पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 18 मई से 24 मई 2018 तक भारत माता मंदिर, विद्यापीठ रोड, कैंट, वाराणसी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर महाराज श्री ने प्रभु के वामन अवतार के वृतांत का विस्तार पूर्वक वर्णन भक्तों को करवाया एवं कृष्ण जन्मोत्सव को बड़ी धूमधाम से मनाया।

भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। कथा के चतुर्थ दिवस पर पाताल पूरी के पीठाधीश्वर पूज्य बालक दास जी महाराज जी ने कथा पंडाल में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाई एवं व्यास पीठ से आशीर्वाद प्राप्त किया। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा कि यह मानव शरीर दुर्लभ है, देवताओं के लिए दो चीजे दुर्लभ हैं जो हमारे लिए सुलभ हो गई हैं। उनके लिए मानव शरीर दुर्लभ है हमे वो प्राप्त है, उनके लिए कथा दुर्लभ है हमे वो भी प्राप्त हो गई। महाराज जी ने एक कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार ब्रह्मा जी को अहंकार हो गया यहां जो कुछ कर रहे हैं हम कर रहे हैं, ये हर किसी को हो जाता है। हर घर का मुखिया सोचता है की मैं इस घर में नहीं होता तो इस घर का पालन पोषण नहीं होता। ब्रह्मा जी ने सोचा की जो कर रहे हैं हम कर रहे हैं हमे ओर मान सम्मान मिलना चाहिए। वो नारायण भगवान के पास गए और बोले हम ब्रह्मा जी के पद से हटना चाहते हैं, तो नारायण भगवान जी ने कहा की जैसा आप को सही लगे। वहां से ब्रह्मा जी निकले तो एक रेगिस्तान में पहुंचे और...

भगवान शिव की नगरी काशी में पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 18 मई से 24 मई 2018 तक भारत माता मंदिर, विद्यापीठ रोड, कैंट, वाराणसी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा में बताया की जिस व्यक्ति की मृत्यु सातवें दिन हो उसको क्या करना चाहिए ? इस वृतांत का विस्तार से वर्णन किया।

भागवत कथा के तीसरे दिन की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा कि जब आप कुछ अच्छा करने जाते हो तो कुछ ना कुछ सवाल आपसे पुछे जरूर जाते हैं, क्यों जा रहे हो ? यही कर लेतें ? लेकिन याद रखना अच्छे कार्य के लिए कभी सोचना नहीं चाहिए। महाराज जी ने एक शायरी करते हुए कहा कि  जिन्दगी ने कई सवालात कर डाले, वक्त ने मेरे हालात बदल डाले। मैं तो आज भी वहीं हूं जो पहले था, बस मेरे लिए लोगों ने अपने ख्यालात बदल डाले।। इसलिए जब भी कहीं जाओ अच्छा काम करने के लिए और उसके बावजूद भी लोग आपसे सवाल पूछे तो फिक्र मत करो बस चलते जाओ। उन्होंने अभी विचार बदले हैं, फिर आकर आपके साथ मिल जाएंगे लेकिन अच्छे काम के लिए आप अपने विचार मत बदलिए। आप अच्छे कार्य करते रहोगे तो गोविंद आपके साथ में रहेंगे। महाराज जी ने कहा कि हम सब की जिंदगी सात दिन की है। पता नहीं कब बुलावा आ जाए और हमें जाना पड़े, इसलिए जीवन में किसी को दुख मत दो। जो दुसरों के दुख को समझता है वो मानव है और जो दुसरे के दुख को बढ़ा दे वही र...

भगवान शिव की नगरी काशी में पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 18 मई से 24 मई 2018 तक भारत माता मंदिर, विद्यापीठ रोड, कैंट, वाराणसी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा के महात्यम का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

भागवत कथा के प्रथम दिवस की शुरुआत दीप प्रज्जवलन, भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थान के साथ की गई। महाराज जी द्वारा वाराणसी में हुए पुल हादसे के मृतकों को श्रद्धांजली देते हुए बाबा भोलेनाथ से प्रार्थना करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए कथा के दौरान 1 मिनट का मौन रखा गया। महाराज जी ने भगवान भोले नाथ से प्रार्थना कि की दिवंगत आत्माओं को प्रभु अपने चरणों में शरण दें। देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत भागवत के प्रथम श्लोक उच्चारण “सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयम नुमः” से की। उन्होंने कहा कि भागवत के प्रथम श्लोक में वर्णन किया गया है त्रिकालों का, देहिक, दैविक, भौतिक। ये तीन प्रकार के ताप है दैहिक देह के द्वारा, दैविक देवताओं के द्वारा, भौतिक समाज के द्वारा दिया हुआ सुख हो या दुख हो और इन तीन तापों से जीव ग्रसित रहता है। इन त्रितापों को जन्म देने वाले, पोसित करने वाले, संहार करने वाले सच्चिदानंद परमपिता परमात्मा है। महाराज जी ने कहा कि पूरे विश्व का ध्यान रखने वाले बाबा भोलेनाथ से बड़ा कथा का प्रेमी कोई नहीं है, न...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -6 || || VRINDAVAN ||

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -6 || || VRINDAVAN ||

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 22 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक शांति सेवा धाम, वृन्दावन में आयोजित होली महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत 108 श्रीमद भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर महाराज श्री ने भागवत में आज रासपंचाध्यायी, श्री कृष्ण - रुक्मणि विवाह का सुन्दर वृतांत विस्तार से वर्णन किया और सुन्दर भजनो का भक्तों को श्रवण कराया।

" जिस प्रकार पेड़ का स्वभाव फल देना, छांव देना होता है उस ही तरह संत का स्वभाव अपने बालकों पर दया करना होता है |" श्रीमद् भागवत कथा के षष्टम दिवस पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा की अपने शिशुओं का संरक्षण करना, उनकी देखभाल करना, उन्हें संस्कारवान बनाना, उन्हें आगे बढ़ाना यही बड़ो का बडप्पन है। बड़े तो पेड़ भी होते है लेकिन जो फल नहीं देता उसको तो हम सम्मान भी नहीं देते, सम्मान योग्य वही है जो फल भी दे, छांव भी दे, इस ही तरह माता - पिता का भी यह कर्तव्य है की वो बालक को केवल जन्म ही न दे अपितु उन्हें संस्कारवान भी बनाये। आज कलयुग में संस्कार की ही कमी दिखाई पड़ती है जो हमारे बच्चो को चारित्रिक पतन की और ले जारही है। ऐसे में संस्कार और प्रभु की भक्ति द्वारा बच्चों को नैतिकता की और ले चले। महाराज जी ने कहा की वृंदावन की भूमि प्रेम की खान है। सोने की खान में सोना मिलेगा, कोयले की खान में कोयला मिलेगा, हीरे की खान में हीरा मिलेगा वैसे ही प्रेम की खान में आ जाओ तो ठाकुर का प्रेम मिलेगा। उन्होंने कहा की अगर कहीं भक्ति महारानी सशरीर द...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -5 || || VRINDAVAN ||

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -5 || || VRINDAVAN ||

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 22 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक शांति सेवा धाम, वृन्दावन में आयोजित होली महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत 108 श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस पर महाराज श्री ने भागवत में आज पूतना वध और श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुन्दर वृतांत विस्तार से वर्णन किया और सुन्दर भजनो का भक्तों को श्रवण कराया।

मन को साफ़ रखो, मर्यादा का पालन करों तो वृंदावन मे गोविंद की कृपा का अनुभव होगा। पूज्य महाराज श्री ने कथा का प्रारम्भ करते हुए कहा की हम लोग ही बहुत ही भाग्यवान है क्योंकि हमे सब तरह के अंगों से भगवान ने संपन्न किया हुआ है। भगवान ने हमको हाथ, पैर, आँख, नाक, दिमाग सभी कुछ दिया हुआ है। मेरे ठाकुर जी ने हमको इतनी सुन्दर जिंदगी दी है। तो हमको उनके इस वरदान को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। इस मानव योनि को प्राप्त करने के बाद भी अगर मानव मेरे प्रभु को याद न करे तो हमसे बड़ा आत्मघाती या पापी इस दुनिया में और कोई नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि भगवान ने हर व्यक्ति को अपनी एक अलग ही समझ दी है। उसी के अनुसार ही हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार ही हर कार्य को करता है। कई अपनी समझ से अपने हर कार्य को भगवान की इच्छा मानकर ही करते है और सदा ही स्वच्छ मन से कार्य को करते है ताकि उनसे कोई भी गलती न हो और कुछ लोग अपने गंदे विचारो से ही कार्य को करते है और उन्ही में सदैव लिप्त रहते है। वो अच्छे और बुरे का फर्क नहीं समझते है। हमको तो सदा ही अच्छे और बुरे का फर्क लेकर ही भगवान की भक्ति को करते ...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -4 || || VRINDAVAN

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -4 || || VRINDAVAN

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 22 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक शांति सेवा धाम, वृन्दावन में आयोजित होली महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत 108 श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर महाराज श्री ने भागवत में वामन अवतार, अजामिल कथा,भगवान् श्री कृष्ण का जन्मोत्सव आदि का वृतांत विस्तार से वर्णन किया और सुन्दर भजनो का भक्तों को श्रवण कराया।

" प्रभु की विशेष कृपा होती है तब पापों का नाश करने के लिए भागवत कथा प्राप्त होती है। " पूज्य महाराज श्री ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा क ी प्रभु की असीम अनुकम्पा का दर्शन यह है की हम सभी श्री वृन्दावन धाम में है और ये ही नहीं प्रियकांत जू की कथा उन्ही के प्रांगड़ में बैठ कर सुनने का सौभाग्य आप सभी भक्तो को प्राप्त हो रहा है। निश्चित ही कुछ पाप ऐसे होते है जो हमे अच्छे कर्मो से , भगवान की कथा से दूर करते है। और कुछ विशेष कृपा जब प्रभु की होती है तो हमारे पापो को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है और वह भागवत कथा के माध्यम से होता है चुतर्थ दिवस की कथा का वृतांत में महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण के प्राक्ट्य की कथा सुनाई मथुरा नगरी में राजा उग्रसेन जिनका एक पुत्र था कंस जो अपनी बहन देवकी को जब विवाह के बाद विदा करने जा रहे थे तो रस्ते में आकाशवाणी हुई की हे कंस तू जिस बहन को इतने आदर के साथ विदा कर रहा है उसीका आठवाँ पुत्र तेरा काल होगा इतना सुनते ही कंस ने देवकी के केश पकडे और रथ से नीचे उतर लिया। और देवकी से बोला की जब तू ही नहीं होगी तो तेरा पुत्र कैसे...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -3 || || Vrindavan

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day -3 || || Vrindavan

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 22 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक शांति सेवा धाम, वृन्दावन में आयोजित होली महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत 108 श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर महाराज श्री ने भागवत में अमर कथा का एवं शुकदेव जी का जन्म का वृतांत विस्तार से वर्णन किया और सुन्दर भजनो का भक्तों को श्रवण कराया।

आज श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर जी एवं उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी जी ने कथा पंडाल में पहुंच कर कथा का रसपान किया एवं महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा श्रवण करने आए भक्तो से महाराज जी ने कहा की कथा को कभी भी फल प्राप्ति के लिए ही नहीं सुनना चाहिए, फल तो मिलेगा ही, कथा का श्रवण मेरे चित्त में मेरे प्रभु के अलावा कोई ओर ना हो इसके लिए कथा सुननी चाहिए। कथा प्रभु के स्वभाव को बताती है। महाराज जी ने कथा सुनने आएं श्रोताओं से कहा की कथा स्थल पर आने की जल्दी करो लेकिन यहां से जाने की कभी जल्दी मत करो। महाराज जी ने कहा की अगर जीव के मन में बस भागवत कथा सुनना है का भाव भी आ जाए तो प्रभु उनके ह्रदय में कैद हो जाते हैं और सच्चे श्रोताओं को इसका अनुभव भी होता है। महाराज जी ने कहा की कथा सुनने की एक ही शर्त है इसे नियम से सुना जाए। महाराज जी ने मोबाइल से होने वाले नुकसानों के बारे में भी बताया। महाराज जी ने कहा की आज के दौर में बच्चो की याददाशत कमजोर होती जा रही है, उसका सबसे बड़ा कारण है मोबा...

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day - 2 || || Vrindavan

SHRIMAD BHAGWAT KATHA || Day - 2 || || Vrindavan

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 22 फरवरी से 1 मार्च 2018 तक शांति सेवा धाम, वृन्दावन में आयोजित होली महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत 108 श्रीमद भागवत कथा के प्रथम दिवस पर महाराज श्री ने भागवत के महात्यम का विस्तार से वर्णन किया और सुन्दर भजनो का भक्तों को श्रवण कराया।

सर्वप्रथम महाराज श्री ने विश्व शांति के लिए ठाकुर जी से प्रार्थना की और उसके बाद भागवत कथा में प्रवेश किया। महाराज जी ने भागवत के प्रथम श्लोक का पाठ किया " सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे। तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुम:।। " महाराज श्री ने बताया की भागवत में आने से हमे सभी तीर्थो का पुण्य प्राप्त हो जाता है। क्योकि जहाँ भागवत कथा होती है वहां सभी पवित्र नदिया , सभी देवता , सारे तीर्थ वास करते है। और कथा पंडाल में आकर भागवत सुनने मात्रा से ही हमे सभी तीर्थो का पुण्य लाभ हमको प्राप्त हो जाता है। पूर्व के युगो में जो हजारों वर्षो की तपस्या करके भगवान की प्राप्ति होती थी। परन्तु कलियुग में केवल नाम संकीर्तन व कथा श्रवण मात्र से ही मनुष्य को ईश्वर की प्राप्ति हो जाती है। प्रत्येक पुराण में कलियुग के प्राणियों के लिए चिंता वयक्त की, कि किस प्रकार कलयुगी मनुष्य का उद्धार हो कारण बस इतना है की आज का मानव धर्म को सर्वोपरि नहीं धन को सर्वोपरि मानता है भागवत नाम उच्चारण करने से सारे पाप नष्ट हो जाते है। अब प्रश्न ये उठता है की बात कौन गारंटी देगा तो मै...