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परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में मोतीझील ग्राउंड, कानपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
यहां महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा कि सबसे पहले आप भारतीय संस्कृति, वैदिक संस्कृति को समझिये, तब यह निर्णय लीजिये की आप अपने बच्चों को क्या बनाना चाहते है? आपका बच्चा मदिरालय जाये या मंदिर जाये, मूवी जाये या सत्संग जाये, स्मोकिंग/ड्रिंकिंग करे या भगवान का चरणामृत पीये, बुढ़ापे में आपको हाथ पकड़ कर घर से निकाल दे या फिर श्रवण कुमार की तरह आपकी सेवा करे।
आप अपने बच्चे को ऐसा डॉ. बनाना चाहेंगे जो मुर्दे से भी पैसा कमाए या ऐसा वैध बने जो किसी के पास पैसा न हो तब भी उसका इलाज कर उसकी जान बचाये। आप अपने बच्चे को ऐसा वकील बनायेगे जो खुद पैसा कमाने के लिए अपने क्लाइंट का केस लम्बा चलाये चाहे उसका घर बार बिक क्यों न जाये, या फिर ऐसा की चाहे कुछ भी हो में अपने क्लाइंट को न्याय दिलवाये। क्या आप अपने बेटे-बेटियों को ऐसा इंजनियर बनाना चाहेंगे जो ऐसे पुल का निर्माण करे जिसमे लोगो की जान चली जाये या फिर ऐसा की उनके बनाये हुई भवन सालो साल चले उनका जगत में नाम हो एक अच्छे समाज का निर्माण हो। आप अपने बच्चो को कैसा बनाना चाहते हो? भारतीय बनाना चाहते हो या अमेरिकन?
अभी मैं हाल ही में अमेरिका गया तो वहाँ के लोग कह रहे थे की महाराज जी यहाँ के बच्चे तो ७वी क्लास में ड्रक्स लेने लगते है। मैंने उससे तो नहीं कहा पर मेरे मन में तो ये बात आई की मेरा भारत भी तुमसे पीछे नहीं है। यहाँ जितनी बुराईंयां है उसको हमारे भारत ने सबसे पहले कैच किया है। आज इन बुराइयों को स्टेटस सिम्बल समझते है शराब पीना, चलते चलते गलियां देना, माँ बाप की इंसल्ट करना, छोटे-कपडे पहन कर निकलेंगे तो हम मॉर्डन है, लेकिन मेरे भाई बहन ये पश्च्यात संस्कृति हो सकती है, भारतीय नहीं। यहाँ तो श्रवण कुमार महान था और महान ही रहेगा।
पंचम दिवस की कथा का प्रसंग प्रारम्भ करते हुए महाराज श्री ने श्री कृष्ण के जन्म का वर्णन करते हुए कहा की जब प्रभु ने जन्म लिया तो वासुदेव जी कंस कारागार से उनको लेकर नन्द बाबा के यहाँ छोड़ आये और वहाँ से जन्मी योगमाया को ले आये। अब देखिये मेरे ठाकुर की माया की वो अपने भक्तो का ख्याल कैसे रखता है? जिसके घर ८५ साल के उम्र में बालक का जन्म हो तो उसकी ख़ुशी का क्या ठिकाना होगा अनुमान लगाइये। क्योंकि मेरा ठाकुर को जो प्रेम से बुलाता है तो वो वहाँ जाये बिना नहीं रह सकते। इसी तरह आप नाम तो लेकर देखो मेरे कन्हैया का, पर मेरे कन्हैया को दिखावा नहीं पसंद जैसे हो वैसे ही उसके सामने जाओ वो तुमको अपना लेगा।
जब पूतना भगवान के जन्म के ६ दिन बाद प्रभु को मारने के लिए अपने स्तनों पर कालकूट विष लगा कर आई तो मेरे कन्हैया ने अपनी आँखे बंद कर ली, कारण क्या था? क्योकि जब एक बार मेरे ठाकुर की शरण में आ जाता है तो उसका उद्धार निश्चित है। परन्तु मेरे ठाकुर को दिखावा, छलावा पसंद नहीं। आप जैसे हो वैसे आओ रावण भी भगवान श्री राम के सामने आया परन्तु छल से नहीं शत्रु बन कर, कंस भी सामने शत्रु बन आया पर भगवान ने उनका उद्दार किया। लेकिन जब पूतना और शूपर्णखा आई तो प्रभु ने आखे फेर ली क्योंकि वो मित्र के वेश रख कर शत्रुता निभाने आई थी।
आज के युग में भी तो यही हो रहा है हम दिखते कुछ है और होता कुछ है। इसलिए आज प्रभु को पाने में कठिनाई है तुम जैसे हो लालची हो तो वैसे ही जाओ, कामी हो तो वैसे ही, पापी हो तो भी मेरा ठाकुर तुमको अपना लेगा। क्योंकि हो तो आखिर तुम उसके ही। रोज बोलो ठाकुर से जो हूँ जैसा हूँ तुम्हारा ही हूँ वो कब तक नज़र बचाएगा। मेरा ठाकुर इतना दयालु है तार ही देगा। जैसे माँ को बालक जैसा भी हो प्यारा लगता है वैसे तुम जैसे हो वैसे ही मेरे ठाकुर के हो जाओ तो वो तुमको अपना प्यारा बना ही लेगा।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

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