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परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में मोतीझील ग्राउंड, कानपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के षष्टम दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
महाराज जी ने बताया की इस जीवन की कीमत केवल एक साधक ही जान सकता है क्योंकि यह मानव जीवन अनमोल है और इसको कुसंगति से बर्बाद नहीं करना चाहिए। इस चौरासी लाख योनियों में मानव जीवन को सर्वश्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इसमें हमें प्रभु का नाम सुमिरन करने का सत्संग करने का अवसर प्राप्त होता है। राम नाम सुमिरन से मानव जीवन का कल्याण हो जाता है।
एक बार का प्रसंग बताते हुए महाराज जी ने कहा की एक आश्रम में एक शिष्य और गुरु जी थे किसी कार्य के कारण उनको आश्रम से बहार जाना पड़ा। शिष्य अकेला रह गया, तो वहां एक ग्रामीण आया उसने गुरूजी के विषय में पूछा की मुझे गुरूजी से मिलना है तब शिष्य ने बताया की गुरूजी तो नहीं है क्या मैं कुछ आपकी मदद कर सकता हूँ? उस आदमी ने बताया की मेरा लड़का बीमार है। तब शिष्य ने बताया की आप एक उपाय करे किसी स्थान पर तीन बार राम नाम लिखना और फिर उसको स्नान कराकर वो जल अपने बालक को पिला देना ईश्वर आपकी सहायता करेगा। उस व्यक्ति की एक पत्थर पर तीन बार राम का नाम लिख कर पत्थर को स्न्नान करा वह जल अपने बेटे को पिला दिया और जल पीते ही उसका बेटा ऐसे ठीक हो गया की जैसे उसको कुछ हुआ ही नहीं।
अब उस व्यक्ति ने सोचा की में उस शिष्य को धन्यवाद तो दे आऊं। उसके उपाय के कारण मेरा पुत्र ठीक हो गया। आश्रम पहुंचने पर देखा की गुरूजी आ गये तो उसने पूरा वृतांत गुरूजी को बताया, तो गुरु ने शिष्य को बुलाया और बहुत डाटा की तुमको भगवान के नाम का महत्त्व नहीं पता, जो काम एक बार लिखने से होता वहाँ तुमने तीन बार राम का नाम लिखवाया।
ऐसा है प्यारे राम नाम की महत्ता और साधक को उस नाम की परख। तो प्यारे इस अनमोल मानव जीवन को व्यर्थ न जाने दो, सत्संग करो, गोविन्द की साधना करो, मेरे गोविन्द जरूर कृपा करेंगे, क्योंकि वो कभी अपने भक्तो से दूर नहीं होता। वो तो हर वक़्त आपके साथ है और असीम कृपा बरसाता है।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

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