पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 19 से 26 नवंबर तक 2017 महादेव स्टेट कामधेनु मैदान , कृष्णा कुंज सोसाइटी के सामने, गणेश चौक नई RTO रोड वस्त्राल, अहमदाबाद में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के प्रथम दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा हमारे जीवन में तीन ताप होते है दैहिक, दैविक और भौतिक। सुख हो या दुःख तीनों तीन प्रकार के होते है। चाहे शारीरिक सुख हो या शारीरिक दुःख हो, चाहे भौतिक सुख हो या भौतिक दुःख हो, चाहे दैविक सुख हो या दैविक दुःख। तीनो प्रकार के ताप व्यक्ति को सुख भी देते है और दुःख भी देते है। पर इनकी उत्पत्ति करने वाले कौन है? इनका पालन करने वाले कौन है? इनका संहार करने वाले कौन है? ऐसे सचिदानंद को हम कोटि-कोटि नमन करते है।
जिन व्यक्तियों के पास सब कुछ हो और उसे भगवान से कुछ नहीं चाहिए होता है तो फिर भी भगवान उस को मोक्ष दे देता है। अगर हम भगवान से कहे की आप मुझसे धन दौलत ले ले और मुझे आप मोक्ष दे दो तो क्या भगवान हमें मोक्ष देंगे? तो क्या इस पर भगवान हमको मोक्ष देंगे क्या? बिलकुल भी नहीं देंगे। तो इस पर भगवान हमको वहां से चले जाने को कहेंगे और जो ये तुम मुझे देने की बात कह रहे हो वो सब भी तो मेरा ही है।
जो मैंने तुझे इस संसार में भेजा है कि जा और तू कुछ सीख ले इस धरती पर जाकर। जो ये तू कहता है की ये मेरा है पर ये तेरा नहीं ये तो मेरा ही है। इस पर भी भगवान हमको मोक्ष नहीं देते है। और उस व्यक्ति को मोक्ष दे देते है जो मात्र इन सात दिनों में श्रीमद भागवत कथा को सुनते है। उस भागवत को सुनाने से बिना मांगे ही वो सब कुछ मिल जाता है जो जन्म जन्म की तपस्या करने के बाद भी हमको नहीं मिलता है।
बड़े बड़े ऋषि मुनि जो तरसते रहते है उस मोक्ष को पाने के लिए वो मात्र इन सात दिनों में भागवत कथा को सुनने से ही हमको मिल जाता है। सबसे शुद्ध अंतिम संस्कार भारतीय परंपरा का होता है। पांच तत्व से बना हुआ ये हमारा शरीर अंत में चिता पर जलने के बाद ही इन पांचों तत्वों में ही इसको समर्पित कर दिया जाता है। एक भी तत्व हमारे अंतिम संस्कार से वंचित नहीं रहता है।
लेकिन आज के मनुष्य के पास इतना समय ही नहीं होता है कि वो भागवत कथा को सुने। लेकिन गन्दी जगह पर वही व्यक्ति बिना बुलाए ही चला जाता है और काफी पैसे खर्च करके आ जाता है।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।
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