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पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 19 से 26 नवंबर तक 2017 महादेव स्टेट कामधेनु मैदान , कृष्णा कुंज सोसाइटी के सामने, गणेश चौक नई RTO रोड वस्त्राल, अहमदाबाद में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के तृतीय दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।





महाराज श्री ने कहा, भगवान साकार के लिए साकार रूप में है और निराकार के लिए निराकार स्वरुप है। आप उसको किस रूप में भजे ये आपके ऊपर है। भगवान तो आपको उस ही रूप में प्राप्त होंगे। परन्तु आज के बच्चे अच्छी बात नहीं सीखेंगे, क्योंकि हमारे बड़े हमें जो सिखाते है हम उस पर ध्यान नहीं देते हैं लेकिन जो हमारे दोस्त हमें सिखाते है वो हम पूर्ण रूप से हम अपने जीवन में उतार लेते है। मैं एक बात बार-बार कहता हूँ की आपके माँ -बाप कभी आपका बुरा नहीं चाहते। दोस्त आपको गलत बात सिखाते है, पीना सिखाते है पर हमारे माँ - बाप हमे वो सिखाते है जिससे हमारा कल्याण हो।
शुकदेव जी महाराज जो सबसे बड़े वैरागी है चूड़ामणि है उनसे राजा परीक्षित जी ने प्रश्न किया कि हे गुरुदेव जो व्यक्ति सातवें दिन मरने वाला हो उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए? किसका स्मरण करना चाहिए और किसका परित्याग करना चाहिए? कृपा कर मुझे बताइये...
इस बात से एक प्रसंग याद आ रहा है की जब यक्ष ने धर्मराज से प्रश्न किया तो उनमें से एक प्रश्न यह भी था की संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? तो धर्मराज ने उत्तर दिया की लोग अपने ही हाथो अपने ही लोगो को शमशान में अंतिम विदाई देकर आते है अपने ही हाथो जला कर आते है फिर भी लौट कर ऐसे जीते है की उनको कभी नहीं मरना। ये ही सबसे बड़ा आश्चर्य है की हम संसार में इस अटल सत्य को भूल जाते है की हमको एक न एक दिन मरना अवश्य पड़ेगा। तो हम क्यों सत्कर्म नहीं करते की हमारा ये मानव जन्म सुधरे, क्यों हम दुसरो की बुराई करते है? अनावश्यक पाप कर्मो को करते है। ये अज्ञानता के वशीभूत होकर सत्य को भुला देते है। यही संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य है.
अब शुकदेव जी ने मुस्कुराते हुए परीक्षित से कहा की हे राजन ये प्रश्न केवल आपके कल्याण का ही नहीं अपितु संसार के कल्याण का प्रश्न है। तो राजन जिस व्यक्ति की मृत्यु सातवें दिन है उसको श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए तो उसका कल्याण निश्चित है। श्रीमद भागवत में 18000 श्लोक, 12 स्कन्द और 335 अध्याय है जो जीव सात दिन में सम्पूर्ण भागवत का श्रवण करेगा वो अवश्य ही मनोवांछित फल की प्राप्ति करता है। राजा परीक्षित ने शुकदेव जी से प्रार्थना की हे गुरुवर आप ही मुझे श्रीमद भागवत का ज्ञान प्रदान करे और मेरे कल्याण का मार्ग प्रशस्थ करे।
भगवान को मनाने की कोशिश करते रहना चाहिए क्योंकि मानव जीवन द्वार है परमात्मा मिलन का, सतकर्म का और मोक्ष प्राप्ति का।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

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