पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 9 से 15 नवंबर तक 2017 कटरा बाजार सीतामढ़ी थाना कोइरुन तहसील ज्ञानपुर, भदोही में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दितीय दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
महाराज श्री ने बताया श्रीमद भगवत वेदरूपी वृक्ष का कटा हुआ फल हैं ये ऐसा फल हैं जिसमे न गुठली हैं न छिलका हैं, संसार का कोई भी वृक्ष हो, कोई भी फल हो उसमे गुठली या छिलका होगा ही, जो कुछ न कुछ फेंका जाये, लेकिन ये एक ऐसा फल हैं जिसमे कुछ फेंकना नहीं हैं बस सब कुछ ग्रह्रण करना हैं, पका हुआ हैं रस से भरा हुआ हैं इसमें बस रस ही रस हैं वेदरूपी वृक्ष का पका हुआ फल हैं इसमें सभी वेदो का सार हैं ये पंचम वेद निराला हैं "अद्धभुत ग्रन्थ हैं"
आज हमारे घर में जो समस्याएं हैं छोटे बड़ो का सम्मान नहीं करते, बड़े छोटो को संस्कार नहीं दे पाते, ये क्या हैं इसके पीछे बजह हैं कि हमने अपने शास्त्रों का अध्ययन छोड़ दिया हैं हमने अपने शास्त्रों में विश्वास करना छोड़ दिया हैं, अब तो जातिवाद का ज़हर इतना घुल गया हैं कि हम लोग पुराणों में भी अपना चेहरा चमकाने बाले लोग ये कह देते हैं कि ब्राह्मणो ने वेद इसलिए बना दिए कि दुनिया इनके नीचे रहे इनको मानती रहे, ये कितना बड़ा अधर्म हैं वेद भगवान के मुख से निकले हैं ये किसी ब्राह्मण ने नहीं बनाया, भगवान के मुख से निकले हैं ये श्रीमद भगवत महापुराण भगवान के मुख से निकली हैं ये व्यक्ति की रचना नहीं हैं, हाँ वेद व्यास जी ने इसका विस्तार किया हैं लेकिन जो मुख्य सूत्र हैं वह भगवान के मुख ने निकला हैं क्योकि हम लोग ये बाते इसलिए करते हैं कि हम स्वम धर्म करना नहीं चाहते,
श्रीमद भगवत महापुराण एक ऐसा पका हुआ फल हैं जिसके भी जीवन में आ जाये,उसके जीवन को जीवन बना दे, उसे जीवन जीना सीखा दे , ये किसी जाति से सम्बंधित नहीं हैं ये सिर्फ भक्ति से सम्बंधित हैं आप ये याद रखिये..... मेरे भाई बहन हम वेद पुराण जैसे ग्रंथो का अगर अध्ययन करे, तो हमारी ज़िन्दगी कभी भी बुरी नहीं हो सकती, अगर इनका अध्ययन न करे तो, हमारी ज़िंदगी कभी अच्छी नहीं हो सकती, कभी नहीं हो सकती, आज जो नई पीढ़ी हैं वो दौड़ रही हैं न, ऐसी रेस में जिसका कोई अंत नहीं, मिला क्या उनको ? एक खिलोने की तरह वो ज़िन्दगी को समझ रहे हैं , और खिलोने की तरह जितनी चावी भर दी उतना चलाना हैं बस, ज़िंदगी के मूल्य को समझो ये साधारण नहीं हैं ये बहुत अमूल्य हैं।
" राधे राधे बोलना पड़ेगा "




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