पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 9 से 15 नवंबर तक 2017 कटरा बाजार सीतामढ़ी थाना कोइरुन तहसील ज्ञानपुर, भदोही में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के तृतीय दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
महाराज श्री ने कहा, जिस प्रकार पेड़ से पत्ता या फल अलग होकर ज्यादा दिन नहीं रह सकता है उसी प्रकार श्रीकृष्ण से अलग होकर ये जीवन बेकार हो जाता है। इसलिए श्रीमद भागवत बहुत ही बड़ा वरदान है हमारे लिए उस भगवान का। जिन्हें ये मिलता है तो उसकी किसमत का क्या कहना है।
कल आपने सुना था कि राजा परीक्षित को श्राप लगा था कि उसकी मृत्यु तक्षक नाग के डसने से सातवे दिन हो जाएगी। तब राजा परीक्षित यमुना के तट पर पहुंचा और वहां पर मौजूद सभी ऋषियों और मुनियों से ये सवाल करने लगा कि जिसकी मृत्यु ही सातवे दिन हो जाएगी तो वह क्या करे। तब अनेकों ऋषियों ने अनेकों पथ उनको दिखाए। इस पर कोई कहता है भजन करो,कोई कहता है गंगा स्नान करे, किसी संत ने कहा मोन करो, स्मरण करो ध्यान करो, उपासना करो। अनेको संत से उन्हें अनेकों विचार प्राप्त हुए। यहाँ पर भागवत में ये नहीं कहा गया है कि जो संतों ने मार्ग दिखाया है वो गलत है। मैं आपको बता दूँ कि यदि आपकी किसी संत में सच्ची निष्ठा है तो आपका सदा कल्याण ही होगा।
ये निष्ठा हम सच्ची निष्ठा को कह रहे है ये पैसे वाली निष्ठा नहीं है कि गुरु जी पैसे वाले है उनसे नाता जोड़ लो तो हमको भी पैसा मिल जायेगा। हमारा भी उनके रिश्ते से नाम हो जायेगा। ऐसी निष्ठा कभी भी हमारा बेडा पर करने वाली नहीं है। तो इसलिए हमको तो सिर्फ उनके वचनो पर ही विश्वास रखना चाहिए। उनके बताए हुए रास्तों पर चलना चाहिए वो भी बिना किसी स्वार्थ भाव के। कोई भी सांसारिक वस्तु हमको उनसे नहीं चाहिए। हमको तो उनसे केवल भागवत भक्ति ही चाहिए। हमको तो उनसे केवल भगवान का नाम ही चाहिए।
अगर ये सच्ची निष्ठा है आपमें तो कभी भी डाउट मत करना। तब किसी भी संत का दिया हुआ मन्त्र ही आपका बेडा पर कर देगा अगर आपका उस संत में विश्वास पक्का है तो। अगर आपका उस संत में विश्वास मजबूत है तो ही ऐसा होगा। इसलिए हमको तो केवल उन्ही लोगों के पास ही जाना चाहिए जो हमको भगवान की भक्ति की ओर अग्रसर करते है। जब जो हमको दिख रहा है तो भी हम उसकी पूजा ढंग से नहीं कर रहे है तो जो हमको सही ढंग से नहीं दिखने वाले को कैसे ढंग से पूजेंगे।
इसलिए तो हमको सदा ही ऐसे संत से ही दीक्षा लेनी चाहिए जो हमको भगवान की सच्ची भक्ति करने को प्रेरित करे। उनके चरणों में ही जाकर हमको उस दीक्षा को ग्रहण करना चाहिए और उनके द्वारा दिए हुए उस मन्त्र का सच्चाई से जाप करते रहना चाहिए। यही सब तो मेरे उस गुरु ने कहा है कि हमें मन को साफ़ रखकर उस मन्त्र का जाप करना चाहिए तो इस तरह से हमारा बेडा पार हो जायेगा। मेरे उस गुरु का मन्त्र कभी भी झूठा नहीं जा सकता है। यदि हम इस भाव के साथ भगवान के उस मन्त्र का जाप करेंगे तो हमको उस परम परमात्मा के दर्शन होंगे ही।
कल आपने सुना था कि राजा परीक्षित को श्राप लगा था कि उसकी मृत्यु तक्षक नाग के डसने से सातवे दिन हो जाएगी। तब राजा परीक्षित यमुना के तट पर पहुंचा और वहां पर मौजूद सभी ऋषियों और मुनियों से ये सवाल करने लगा कि जिसकी मृत्यु ही सातवे दिन हो जाएगी तो वह क्या करे। तब अनेकों ऋषियों ने अनेकों पथ उनको दिखाए। इस पर कोई कहता है भजन करो,कोई कहता है गंगा स्नान करे, किसी संत ने कहा मोन करो, स्मरण करो ध्यान करो, उपासना करो। अनेको संत से उन्हें अनेकों विचार प्राप्त हुए। यहाँ पर भागवत में ये नहीं कहा गया है कि जो संतों ने मार्ग दिखाया है वो गलत है। मैं आपको बता दूँ कि यदि आपकी किसी संत में सच्ची निष्ठा है तो आपका सदा कल्याण ही होगा।
ये निष्ठा हम सच्ची निष्ठा को कह रहे है ये पैसे वाली निष्ठा नहीं है कि गुरु जी पैसे वाले है उनसे नाता जोड़ लो तो हमको भी पैसा मिल जायेगा। हमारा भी उनके रिश्ते से नाम हो जायेगा। ऐसी निष्ठा कभी भी हमारा बेडा पर करने वाली नहीं है। तो इसलिए हमको तो सिर्फ उनके वचनो पर ही विश्वास रखना चाहिए। उनके बताए हुए रास्तों पर चलना चाहिए वो भी बिना किसी स्वार्थ भाव के। कोई भी सांसारिक वस्तु हमको उनसे नहीं चाहिए। हमको तो उनसे केवल भागवत भक्ति ही चाहिए। हमको तो उनसे केवल भगवान का नाम ही चाहिए।
अगर ये सच्ची निष्ठा है आपमें तो कभी भी डाउट मत करना। तब किसी भी संत का दिया हुआ मन्त्र ही आपका बेडा पर कर देगा अगर आपका उस संत में विश्वास पक्का है तो। अगर आपका उस संत में विश्वास मजबूत है तो ही ऐसा होगा। इसलिए हमको तो केवल उन्ही लोगों के पास ही जाना चाहिए जो हमको भगवान की भक्ति की ओर अग्रसर करते है। जब जो हमको दिख रहा है तो भी हम उसकी पूजा ढंग से नहीं कर रहे है तो जो हमको सही ढंग से नहीं दिखने वाले को कैसे ढंग से पूजेंगे।
इसलिए तो हमको सदा ही ऐसे संत से ही दीक्षा लेनी चाहिए जो हमको भगवान की सच्ची भक्ति करने को प्रेरित करे। उनके चरणों में ही जाकर हमको उस दीक्षा को ग्रहण करना चाहिए और उनके द्वारा दिए हुए उस मन्त्र का सच्चाई से जाप करते रहना चाहिए। यही सब तो मेरे उस गुरु ने कहा है कि हमें मन को साफ़ रखकर उस मन्त्र का जाप करना चाहिए तो इस तरह से हमारा बेडा पार हो जायेगा। मेरे उस गुरु का मन्त्र कभी भी झूठा नहीं जा सकता है। यदि हम इस भाव के साथ भगवान के उस मन्त्र का जाप करेंगे तो हमको उस परम परमात्मा के दर्शन होंगे ही।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।




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