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पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 9 से 15 नवंबर तक 2017 कटरा बाजार सीतामढ़ी थाना कोइरुन तहसील ज्ञानपुर, भदोही में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के षष्टम दिवस में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।






महाराज श्री ने बताया ,कि भावना में भाव हैं तो भव से बेड़ा पार हैं जो कुछ हैं वो भाव का ही हैं जो कहते है की भगवान नहीं हैं उनके अंदर वो भाव नहीं हैं उनके लिए भगवन नहीं हैं और जिनके मन में भाव हैं उनके लिए भगवान भी हैं, सब कुछ भावना के ऊपर ही निर्भर करता हैं तुलसी दास जे ने कहा हैं कि... जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी जिसकी जैसी भावना हैं भगवान उसको बैसा ही नजर आता हैं। जैसे. कहा गया हैं.......
"पत्थर की राधा प्यारी पत्थर के कृष्ण मुरारी
पत्थर से पत्थर घिस कर पैदा होती चिंगारी
पत्थर की नारी अहिल्या पग से श्री राम ने तारी
पत्थर के मठ मे बैठी मां मेरी शेरोन वाली"
महाराज श्री ने ये भी बताया कि इस जीवन की कीमत केवल एक साधक ही जान सकता है क्योंकि यह मानव जीवन अनमोल है और इसको कुसंगति से बर्बाद नहीं करना चाहिए। इस चौरासी लाख योनियों में मानव जीवन को सर्वश्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इसमें हमें प्रभु का नाम सुमिरन करने का सत्संग करने का अवसर प्राप्त होता है। राम नाम सुमिरन से मानव जीवन का कल्याण हो जाता है।
तो प्यारे इस अनमोल मानव जीवन को व्यर्थ न जाने दो, सत्संग करो, गोविन्द की साधना करो, मेरे गोविन्द जरूर कृपा करेंगे, क्योंकि वो कभी अपने भक्तो से दूर नहीं होता। वो तो हर वक़्त आपके साथ है और असीम कृपा बरसाता हैं।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

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