भागवत साधन भी है और साध्य भी
पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 6 से 13 दिसंबर 2017 तक, भायंदर, ईस्ट मुम्बई में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
आज कथा के प्रारम्भ होने से पहले मुंबई के कार्यकर्ताओं एवं समिति के सदस्यों द्वारा महाराज जी को सूंदर पगड़ी बांध कर उनका अभिनन्दन किया। इस पर महाराज जी ने सभी भक्तों को इतने प्रेम के लिए धन्यवाद दिया और कहा की जितना सूंदर मेरे ठाकुर का द्धार आप सभी कार्यकर्ताओं ने सजाया है व जितने प्यार से जो ये पगड़ी बांधकर आपने ये प्यार मेरे सर माथे दिया है उसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत साधुवाद।
महाराज जी ने बताया की भागवत कथा सुनने से किस प्रकार प्राणी का कल्याण हो जाता है जो भी भागवत की शरण में आएगा उस की मुक्ति निश्चित है, भागवत परमात्मा स्वरुप है। इसमें श्याम सुन्दर की कथा है। जो लोग ये कहते है की भागवत में राधा रानी का नाम नहीं है। तो मैं यह उनको बता देना चाहता हुँ कि भगवात में राधा रानी का नाम एक बार नहीं कई बार आता है। भागवत प्रारंभ ही सर्वेश्वरी राधा रानी के नाम से होती है क्योंकि इसे श्रीमद भागवत कहते है तो प्यारे श्री का मतलब ही राधा है। तो बोलो कौन कौन राधा रानी के बारे में सुनना चाहते है?
राधा रानी के स्वरुप का वर्णन जो पुराणों में किया गया हो उसे कही अधिक रहस्यमयी है। राधा रानी के स्वरुप का वर्णन तो स्वयं कृष्ण भी नहीं कर सकते।
अगर राधा रानी को जानना है तो पहले अपने आप को जानिए, आप मन है, आप बुद्धि है, ये शरीर आपका है तो कौन है? अगर आपसे पूछा जाये तो आप कहेगे की ये मेरी आत्मा है, मेरा शरीर है, मेरी बुद्धि है और ये शरीर इस आत्मा का नौकर है। मैं ऐसा क्या करुँ की मेरी आत्मा प्रसन्न हो जायें, अब मुझे बताये की अगर शरीर आत्मा के अधीन है तो आत्मा का स्वामी कौन? तो आत्मा का स्वामी है परमात्मा श्री कृष्ण ये मेरी आत्मा उसी कृष्ण का अंश है। और श्री कृष्ण की आत्मा है राधा रानी। तो ये जो आत्मा बुद्धि और वाणी का विषय नहीं है। कोई मेरी आत्मा का वर्णन कैसे कर सकता है तो जब मेरे प्रभु की आत्मा ही राधा रानी है। तो उनका वर्णन तो संभव भी नहीं है। बस हम इसको अनुभव कर सकते है और वो भी तब ही जब हम कृष्ण रस का रसपान करे।
महाराज श्री ने कहा कि कलयुग में भागवत सबसे कल्याणकारी है। भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली भागवत ज्ञान गंगा की कोई सीमा नहीं है। भगवान प्राप्ति के लिए भागवत साधन और साध्य दोनों है। भगवान श्रीकृष्ण ने भागवत में अपने स्वरूप को ढाला है। इसलिए भागवत साक्षात श्री कृष्ण है और श्री कृष्ण अपने भक्तों की सच्ची पुकार को कभी नहीं ठुकराते।
महाराज श्री ने अपार भीड़ को वृंदावन की महिमा बताते हुए कहा कि वृंदावन में पैदा होने की इच्छा लेकर देवताओं ने भी कठोर तपस्या की। ब्रह्मा जी ने यहाँ जन्म लेने के लिए हजारों वर्षों तक तपस्या की। यहां तक कि वृज में पैदा होने पर्वत बनना भी स्वीकार किया। ताकि श्री कृष्ण को चाहने वालों के पैरों की धूल अपने ऊपर पड़ सके। ऐसा माना जाता है कि वृज को भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य प्राप्त है ।
कथा को आगे बढ़ाते पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन की इच्छा भगवत प्राप्ति की होनी चाहिए। सांसारिक चिंताओं से परे हटकर केवल आत्म कल्याण की सोचो। इस जिंदगी में जब भी कोई दुख आ जाए तो उसे इस दुनिया वालों को मत सुनाना। क्योंकि यह दुनिया वाले तुम्हारे दुख को सबके सामने फैला देंगे। अपना दुःख केवल दो ही लोगों को सुनाना। एक अपने गुरु और दूसरे अपने परमात्मा को। यह निश्चित समझो तुम्हारा सब दुख हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
|| राधे राधे बोलना पड़ेगा ||




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