पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 4 से 10 जनवरी तक, सी. डी. पार्क, साल्ट लेक, कोलकाता आयोजित श्रीमद भागवत कथा के षष्टम दिवस पर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।
आज की कथा का प्रारम्भ एक सुन्दर भजन से वृंदावन नगरी जाने के लिए गोपियों की समस्या को सुनाया की कैसे वो मोहन से कहती है की "कैसे आऊं मैं कन्हैया दूर नगरी बड़ी दूर नगरी" कठिनाई उस समय भी थी और आज भी है। अंतर केवल इतना है उस समय गोपियों को समाज का, परिवार का लोगो के बातो का भय था फिर भी गोपियों ने सब बाधाओं को पार कर कृष्ण को पाया। पर आज का मानव कृष्ण को पाना नहीं चाहता क्यों? क्योकि आज के मानव के पास समय नहीं है क्योकि उसको सांसारिक कामो से फुरसत नहीं। घर ,ऑफिस, बच्चे, सामाजिक प्रतिष्ठा, रुपये कमाने की अंधी दौड़ में वो भगवान् को भूल बैठा है।
"विरथा जीवन क्यों खोवे रे मन जीवन है अनमोल ,या रसना का तू कर प्रयोग तू राधे राधे बोल" तुमको यह जीवन जो मिला है तुम इसको व्यर्थ में ही गवां रहे हो। उसका उपयोग करो जिस तरह पारस का मोल है ये मानव जीवन भी भगवान ने आपको दिया है जो पारस से भी बढ़कर है क्योंकि यह मानव जीवन अनमोल है और इसको कुसंगति से बर्बाद नहीं करना चाहिए। इस चौरासी लाख योनियों में मानव जीवन को सर्वश्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इसमें हमें प्रभु का नाम सुमिरन करने का सत्संग करने का अवसर प्राप्त होता है। राम नाम सुमिरन से मानव जीवन का कल्याण हो जाता है।
आज का मानव यह बोलता है की अभी हमारी उम्र नहीं है मंदिर जाने की बुढ़ापे में करेंगे भक्ति। तो मेरे प्यारे आपसे में पूंछता हूँ कि बुढ़ापे में डिस्को जा सकोगे ? तो आज का युवा ये बोलेगा की बुढ़ापे में कैसे जा सकते है उस समय तो शक्ति - ताकत नहीं रहेगी कैसे नाचेंगे तो मुझे बताओ की जब बुढ़ापे में सर्दी के मौसम में सर्दी ज्यादा लगे , गर्मी में गर्मी सताए , कफ से गला जाम हो जाये आवाज़ नहीं निकले तब लोग भगवान का नाम तो मेरे प्यारे सच तो यह है की बागवान की भक्ति करने के लिए सबसे ज्यादा शक्ति की जरूरत होती है। क्योकि जब तक आप में शक्ति और पवित्रता नहीं है तब तक ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती।
एक शिकारी था और उसका एक वफादार कुत्ता था। एक बार शिकारी का बहुत ही बुरा समय आया तो उसने अपना कुत्ता एक सेठ को गिरवी रख दिया और बोलै जब मेरे पास धन आजायेगा तो मै अपने कुत्ते को वापस ले जाऊंगा। एक रात सेठ के घर चोर आये और सब सामान चुरा ले गए तो उस कुत्ते ने बिना आवाज़ किये चोरो के पीछे पीछे चल दिया। सुबह होने को थी इसलिए चोरो ने उस धन को के स्थान पर गाड़ दिया कुत्ता सब देख रहा था। जब सेठ ने देखा की चोरी होगयी है तो वो उस कुत्ते पर गुस्सा होने लगे की शिकारी ने कहा था की ये तो बफादार है पर इसने तो कुछ नहीं किया। तभी उस कुत्ते ने सेठ की धोती पकड़ कर उस स्थान तक ले गया जहाँ चोरो ने धन दवाया था। अब सेठ बहुत खुश हुआ और उसने एक पत्र लिख कर कुत्ते के गले में टाँग दिया की शिकारी मैंने तुम्हारा कर्ज़ा माफ़ कर दिया क्योकि तुम्हारे कुत्ते ने मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है। और कुत्ते को छोड़ दिया कुत्ता जा रहा था, उधर शिकारी ने कुछ धन अर्जन कर के सेठ के पास जारहा था उसने दूर से देखा की उसका कुत्ता आरहा है तो उसने सोचा की इसने मेरा वचन तोड़ दिया और उसने उसको दूर से गोली मार दी और कुत्ता मर गया। जब पास आया तो देखा की उसके गले में एक पत्र था अब वो फूट - फूट कर रोने लगा पर अब पछताने से उसका कुत्ता वापस नहीं आएगा।
इसी प्रकार यह मानव जीवन जो मिला है उसको गवां देने के बाद आप कितना भी पछताए पर ये वापस लौट कर नहीं मिलेगा। आप पारस का तो मोल चुका सकते हो पर। ये मानव जीवन पारस से भी अनमोल है जो हमे भगवान ने दिया तो समय रहते इसका सदुपयोग करिये तो ठाकुर आपकी सद्गति अवश्य करेगा।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।
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