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पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 17 - 23 जनवरी तक, बांग्ला बाजार चौराहा, रेल नगर मैदान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश आयोजित श्रीमद भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।





महाराज श्री ने भागवत कथा के षष्ठम दिवस की शुरुआत भी भागवत आरती के साथ की गई, साथ ही विश्व शांति के लिए प्रार्थना की गई। छठे दिन की कथा में कई वीवीआईपी ने कथा पंडाल में पधारे। माननीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सुपुत्र पंकज सिंह, ग्राम विकास चिकित्सा स्वास्थय मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार माननीय डॉ महेंद्र सिंह जी और पूर्व विधायक सुरेश तिवारी जी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिती दर्ज करवाई।
पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि गोपियों ने श्री कृष्ण को पाने के लिए त्याग किया परंतु हम चाहते हैं कि हमें भगवान बिना कुछ किये ही मिल जाये, जो की असम्भव है।
महाराज श्री ने बताया कि शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं राजन जो इस कथा को सुनता हैं उसे भगवान के रसमय स्वरूप का दर्शन होता हैं। उसके अंदर से काम हटकर श्याम के प्रति प्रेम जाग्रत होता हैं।
जब भगवान प्रकट हुए तो गोपियों ने भगवान से 3 प्रकार के प्राणियों के विषय में पूछा।
1 . एक व्यक्ति वो हैं जो प्रेम करने वाले से प्रेम करता हैं।
2 . दूसरा व्यक्ति वो हैं जो सबसे प्रेम करता हैं चाहे उससे कोई करे या न करे।
3 . तीसरे प्रकार का प्राणी प्रेम करने वाले से कोई सम्बन्ध नही रखता और न करने वाले से तो कोई संबंध हैं ही नही।
आप इन तीनो में कौन से व्यक्ति की श्रेणियों में आते हो?
भगवान ने कहा की गोपियों! जो प्रेम करने वाले के लिए प्रेम करता हैं वहां प्रेम नही हैं वहां स्वार्थ झलकता हैं। केवल व्यापर हैं वहां। आपने किसी को प्रेम किया और आपने उसे प्रेम किया। ये बस स्वार्थ हैं।
दूसरे प्रकार के प्राणियों के बारे में आपने पूछा वो हैं माता-पिता, गुरुजन। संतान भले ही अपने माता-पिता के , गुरुदेव के प्रति प्रेम हो या न हो। लेकिन माता-पिता और गुरु के मन में पुत्र के प्रति हमेशा कल्याण की भावना बनी रहती हैं।
लेकिन तीसरे प्रकार के व्यक्ति के बारे में आपने कहा की ये किसी से प्रेम नही करते तो इनके 4 लक्षण होते हैं-
आत्माराम- जो बस अपनी आत्मा में ही रमन करता हैं।
पूर्ण काम- संसार के सब भोग पड़े हैं लेकिन तृप्त हैं। किसी तरह की कोई इच्छा नहीं हैं।
कृतघ्न – जो किसी के उपकार को नहीं मानता हैं।
गुरुद्रोही- जो उपकार करने वाले को अपना शत्रु समझता हैं।
श्री कृष्ण कहते हैं की गोपियों इनमे से मैं कोई भी नही हूँ। मैं तो तुम्हारे जन्म जन्म का ऋणियां हूँ। सबके कर्जे को मैं उतार सकता हूँ पर तुम्हारे प्रेम के कर्जे को नहीं। तुम प्रेम की ध्वजा हो। संसार में जब-जब प्रेम की गाथा गाई जाएगी वहां पर तुम्हे अवश्य याद किया जायेगा।
पहले तो भगवान ने रास किया था लेकिन अब महारास में प्रवेश करने जा रहे हैं। तीन तरह से भगवान श्री कृष्ण ने रास किया है। एक गोपी और एक कृष्ण, दो गोपी और एक कृष्ण, अनेक गोपी और एक कृष्ण।
इस महारास में कामदेव ने गोपियों को माध्यम बनाकर 5 तीर छोड़े थे।
अब महारास के समय कामदेव ने 5 तीर छोड़े-
1. आलिंगन 2. नर्महास 3. करळकावलिस्पर्श 4. नखाग्रपात 5 . षस्मित्कटाक्षपात
ये पांच तीर कामदेव ने गोपियों के माध्यम से छोड़े थे लेकिन भगवान ने हर तीर को परास्त किया।
श्रीमद भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए ठाकुर जी महाराज ने कहा कि हमारी इच्छाएं ही सारे पापों की जड़ हैं। इसलिए इन इच्छाओं को ही छोड़ दे। दुनिया की सारी बाधाएं दूर हो जाएंगी। हर भक्त के मन में यह भाव होना चाहिए कि हमें श्री कृष्ण मिले, भले ही मेरे जीवन के अंतिम साँस से पहले ही क्यों ना मिले। उन्होंने कहा कि सद्कर्मों से आत्मा खुश होती है। इसका प्रमाण देखना हो तो कभी किसी का छीन करके खाओ, देखना आत्मा खुश नहीं होगी। फिर किसी ज़रूरतमंद को कुछ खिलाकर देखना कि आत्मा कितनी खुश होती है। कथा में श्री कृष्ण- रुक्मिणी विवाह का वर्णन हुआ। आज कृष्ण-रुक्मणि विवाहोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया एवं सभी भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण-रुक्मणी की सुन्दर झांकी के दर्शन किये।
महाराज श्री ने बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर बच्चों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने बच्चों से कहा की अपने कमरे में मां सरस्वती की फोटो लगाएं और उन्हें रोज सुबह उठ कर प्रणाम करें और हो सके तो घी का दीपक जलाएं। महाराज जी ने सभी श्रोताओं को बसंती पंचमी की शुभकामनाएं भी दी।
महाराज जी ने कहा की गौ माता की महिमा का वर्णन करते हुए कहा की हे भारतवासियों गौ माता से नफऱत नहीं गौ माता से प्रेम करो, गऊ माता की सेवा स्वयं श्री कृष्ण करते हैं। उन्होंने आगे कहा हमारी माता हमें 2-4 साल दूध पिलाती है लेकिन गौ माता हमें उम्र भर दूध पिलाती है, उससे बड़ी मां कौन होगी। जो गऊ की सेवा करते हैं वो कभी निर्धन नहीं हो सकते। गाय पूरे विश्व की मां है।
राधे राधे बोलना पड़ेगा।।

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