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अंबुबाची महोत्सव धर्मरत्न शांतिदूत पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में 21 जून से 27 जून 2018 तक स्थान – सोनाराम प्लेग्राउण्ड, ए.टी.रोड, भरलुमुख, गुवाहाटी ,असम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा के महात्यम का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।





द्वितिय दिवस की शुरुआत करते हुए परम पुज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज जी ने प्रभु श्री कृष्ण का सुंदर भजन श्रवण किया।
उन्होंने कहा कि जो मोक्ष चाहने वाले है उनके लिए भागवत सबसे सरल साधन है। मुक्ति मिलना आसान नहीं है, हज़ारों हज़ारों वर्षों तक तप करने के बाद भी मोक्ष सहज प्राप्त नहीं होता। अगर हम कहें कि हमें मुक्ति तप के माध्यम से मिल जाए, किसी और साधन से मिल जाए, तो ये आसान नहीं है, मुक्ति मिली तो है लेकिन आसानी से नहीं। उन्होंने कहा कि भागवत मात्र 7 दिन में मोक्ष देती है, लेकिन ये मुमकिन तब ही है जब हम भागवत को नियम और विधि विधान से सुने, ऐसा करने से आप जो चाहते है वो ही आपको मिलेगा। धन चाहने वालों को धन, संतान चाहने वालों को संतान, पाप नष्ट करना चाहते हो तो पाप नष्ट हो जाऐंगे, पापी से पापी कितना भी बड़ा पापिष्ट क्यूं ना हो वो भागवत कथा सुन ले तो वो निष्पान हो जाता है, ऐसी शक्ति है पवित्र ग्रंथ श्रीमद भागवत कथा में। श्रीमद भागवत कथा प्रत्येक रोग की औषधी है जिसे आप औषधालय भी कह सकते हैं।
भगवान श्री कृष्ण गोकुल में विराजमान, उदास सर्वेश श्री राधा ने पूछा आप उदास क्यूं हैं? तो श्री कृष्ण कहते हैं, कलयुग के लोग बुरा कर्म कर रहें हैं, बुरी योनिओं में जा रहें हैं, बहुत दुख पा रहें हैं, कष्ट पा रहें हैं, जब वो दुखी होते हैं, तो मैं दुखी होता हूं। महाराज श्री ने कहा कि आज हमारी स्थिति क्या है, पहले किसी राजा के राज्य में एक भी चोर होता था, उसकी कहानी लिखी जाती थी, पहले एक आद चोर होता था इतिहास बन जाता था, अब तो गली महोल्ले सुरक्षित नहीं है। राक्षक कौन है, किसे कहते हैं? राक्षक वो नहीं जो सिर्फ रावण या कंस कि सेना में होता था, राक्षक वो हैं जो माता पिता को नहीं मानते, जो अपने धर्म को नहीं मानते, अपने आदर्णियों से उनका आदर नहीं करते बल्कि उनका अपमान करते हैं, जिनकी नज़र हमेशा पराये धन पर लगी रहती है। जो हमेशा पराई स्त्रियों के साथ रमण करते हैं, या फिर उन पर नज़र रखते हैं।
महाराज श्री ने ज़ोर देते हुए कहा कि जो पराया धन है, वो मिट्टी है। उन्होंने कहा कि जो तुम्हारे भाग्य में नहीं, और तुम्हें उस धन की प्राप्ति चोरी से हुई है और तुमने उसे अपने घर रख लिया है, वो धन भी तुम्हारे विनाश की वजह बन सकता है। धन से सुख नहीं मिलने वाला, जितना तुम्हारे भाग्य में लिखा है उसी से संतोष करो, अगर अधिक पाने कि इच्छा है तो मेहनत करो।
महाराज श्री ने श्रीमद भागवत कथा के माध्यम से कहा कि आज की एजुकेशन में प्रॉब्लम है,आजकल बच्चों को मां बाप भी वहीं ग्यान देना चाहते है जिससे बच्चे अपना पेट भर सकें।
पूज्य महाराज श्री ने बताया कि श्रीमद भागवत की कथा ही अमर कथा है । भगवान् शिव ने पार्वती अम्बा को अमर कथा सुनाई और भागवत में ऐसा लिखा है कि जिसने भागवत की कथा श्रद्धा से सुनली वो माँ के गर्भ मेंदुबारा नहीं आएगा। यह शरीर छूटने के बाद वह वहाँ पहुँच जायेगा, जहाँ से दुबारा फिर जन्म नहीं लेना पड़ेगा , सदैव आनंद रहेगा। सुखदेव भगवान् भी यह कथा सुनने लगते हैं, पार्वती अम्बा सुनती जा रहीं हैं।
भगवान् शंकर के नेत्र बंद थे, समाधि में योग में स्थित होकर सूना रहे हैं । पारवती अम्बा हूँ! हूँ! करती रहीं और दसवां स्कन्ध समाप्त हुआ तो नींद आ गयी उन्हें । सुखदेव भगवान् हूँ! हूँ! करते रहे और बारहवें स्कन्ध के बादजब आँख खुली तो देखा पार्वती जी सो रहीं थीं । हूँ हूँ ! कौन कर रहा था ? पारवती जी से पूछा तो उन्होंने कहा प्रभु दशम स्कन्ध की समाप्ति तक, मैंने बहुत सावधान हो कर सुना, पता नहीं क्या आपकी माया थी कि मेरीआँख लग गई पर हूँ ! कौन कर रहा था, देखा तो सुखदेव जी तोते के रूप में हूँ! हूँ! कर रहे थे । भगवान् शंकर ने चाहा इसको मार दें ! जो खूफिया होते हैं, घुस पैठिये उनको तो मार डालना चाहते हैं, तो भगवान् शंकर नेत्रिशूल उठाया और चला दिया , सुखदेव जी वहां से भागे और वेद व्यास जी की पत्नी पिंगला के पेट में चले गए, वे बाल सूखा रहीं थीं , उसी समय उनको जम्हाई आई । पार्वती जी बाद में बोलीं भगवान् शंकर से ..
प्रभु, इसीलिए तो लोग आपको भोला शंकर कहते हैं, एक ओर तो आप कहते हो जो भागवत की कथा सुनले वो अमर हो जाता है और दूसरी ओर आप सुखदेव को मारना चाहते हो .. जब वो अमर कथा सुन ही चुका है तोमरेगा कैसे !
ऐसा मान लो कि भगवान् कृष्ण का ही संकल्प है । बारह वर्ष तक सुखदेव जी गर्भ में रहे, ऐसा शास्त्र कहते हैं, और वहीँ भगवत चिंतन, आत्म चिंतन करते रहे । व्यास जी ने प्रार्थना की, कि भाई कौन ऐसा योगी, पत्नी के गर्भमें आ गया जो बाहर आना ही नही चाहता । सुखदेव भगवान् ने कहा की मैं बाहर तब आउंगा जब मुझे ये वचन मिल जाये कि भगवान् की माया मुझ पर हावी नहीं होगी । पैदा होने के बाद भगवान् की माया एक दम पकडतीहै ।
ये तीन इच्छाएं बड़ी जबरदस्त होती हैं , इन तीन इच्छाओं पर विजय पाना बहुत कठिन है वो तो ऊपर वाला कृपा कर दे तो ठीक है, एक तो बेटे की इच्छा, दुसरे धन की इच्छा और तीसरे समाज में सम्मान पाने की जो इच्छा है, ये हर व्यक्ति में होती है । इश्वर की कृपा के बिना, प्रभु की माया पे विजय पाना बहुत कठिन है।
जब सुखदेव भगवान् प्रगट हुए और थोड़े समय के बाद वे जवान हुए, इतने सुंदर थे, भगवान् कृष्ण का चिंतन करते करते स्वयं कृष्ण स्वरूप ही हो गये थे। अभी जनेउ संस्कार हुआ नहीं, कि सुखदेव जी महाराज घर से निकलके चल पड़े तप करने, कहते हैं मैं घर में नहीं रहूँगा भजन करूँगा । सुखदेव जी घर से निकले, कि वेदव्यास के मन में ममता जाग उठी, कितना सुंदर पुत्र मिला, कुछ दिन और घर रह जाता तो अच्छा था। दुनिया को उपदेशदे रहे है।
|| राधे राधे बोलना पड़ेगा ||



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