भागवत कथा के पांचवे दिन की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। कथा प्रारम्भ से पूर्व आज पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज को काशी विद्वत परिषद द्वारा “सनातन धर्म संरक्षक” की उपाधी से सम्मानित किया गया। इस उपाधी को प्रदान करने के लिए काशी विद्वत परिषद के महामहोपाध्याय प्रो० रामयत्न शुक्ल जी, महामंत्री पूर्व कुलपति संपूर्णानंद विश्वविद्यालय प्रोफेसर शिव जी उपाध्याय, प्रवक्ता प्रो० दिनेश कुमार गर्ग, मंत्री प्रो० राम नारायण द्विवेदी, डॉ०ब्रज भूषण ओझा, पश्चिमी भारत के प्रभारी कार्ष्णि नागेंद्र महाराज, आचार्य राकेश महाराज पराशर, आचार्य दीपक मालवीय, प्रोफेसर हरप्रसाद दीक्षित एवx अन्य विद्वत समाज के सम्मानित व्यक्ति उपस्थित थे। देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा कि जब प्रभु की कृपा जीव पर होती है तब उन्हे श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है और जब अवरणीय सतगुणों का जब संग्रह होता है तब जीव श्रीमद्भागवत कथा करवाने के लिए प्रयत्नशील होता है। महाराज जी ने कल के कथा क्रम को याद दिलाते हुए कहा कि भगवान प्रकट क्यों होते ...