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पुरुषोत्तम मास एवं एकादशी के पावन अवसर पर पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने आज वृन्दावन धाम की परिक्रमा की।

पुरुषोत्तम मास एवं एकादशी के पावन अवसर पर पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने आज वृन्दावन धाम की परिक्रमा की। इस अवसर पर उनके साथ भक्त एवं संस्था के सदस्य भी मौजूद रहे।

पुरूषोत्तम मास के पावन अवसर पर विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा वृन्दावन एवं मथुरा में शीतल एवं मीठे जल की प्याऊ लगाकर जल सेवा की जा रही है।

पुरूषोत्तम मास के पावन अवसर पर विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा वृन्दावन एवं मथुरा में शीतल एवं मीठे जल की प्याऊ लगाकर जल सेवा की जा रही है। चौरासी कोस परिक्रमा एवं ब्रज दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को भीषण गर्मी में शीतल जल से राहत प्रदान करने हेतु वृन्दावन परिक्रमा मार्ग, प्रियाकान्त जू मंदिर, छटीकरा मार्ग एवं मथुरा में गोवर्धन चौराहा पर प्याऊ का शुभारम्भ किया गया है। शुक्रवार को संस्था सचिव श्री विजय शर्मा जी ने श्रद्धालुओं को मीठा जल पिलाकर सेवा कार्य किया । भीषण गर्मी में राहगीरों ने अपनी प्यास बुझाते हुये संस्था के सेवा प्रकल्पों की सराहना की । पूज्य महाराज श्री की प्रेरणा से विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर इसी प्रकार के सेवाकार्य किये जाते रहे हैं और आगे भी किये जाते रहेंगे।

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 18 मई से 24 मई 2018 तक भारत माता मंदिर, विद्यापीठ रोड, कैंट, वाराणसी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम दिवस पर महाराज श्री ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की सुंदर कथा श्रोताओं को श्रवण कराई। भागवत कथा के सातवें दिन की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई।

कथा के अंतिम दिन कथा से पूर्व विभिन्न संगठनों द्वारा महाराज श्री को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा कि जीवन में दो बाते हैं कि एक तो आप अपने विचारों से लोगों को अच्छा बना सकते हो, दूसरा आप अपने बिचारों से दूसरों को बुरा बना सकते हो। ये आपके उपर निर्भर करता है कि आप चाहते क्या हो और हमें यह चाहत रखनी चाहिए की हमें अपने विचारों से लोगों को अच्छा बनाएं और भगवान की ओर लेकर चलें क्योंकि यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा आनन्द भी है। महाराज श्री ने कहा कि काफी युवाओं को यह संदेह होता है कि भगवान को इतने विवाह करने की क्या आवश्यकता पड़ी ? सबसे पहले यह समझ लिजिए भगवान भगवान हैं, उन्हें जगपति कहा जाता है। जगत में जितने लोग हैं उनके पति जगत पति हैं वो सब के पति है और यही बात समझने के लिए गुरू की आवश्यकता होती है। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि गुरू की क्या जरूरत है ? रोटी कमाना कौन सिखाता है ? धन कमाना कौन सिखता है ? जो यह सिखाता है कि रोटी कमाने के लिए, धन कमाने के लिए क्या करना पडेगा जो यह सिखाता है वो तुम्हारा गुरू है...

पूज्य महाराज जी द्वारा बीती रात काशी की विश्वविख्यात पतित पावनी मां गंगा की भव्य आरती के दर्शन किए एवं मां गंगा की आरती की।

पूज्य महाराज जी द्वारा बीती रात काशी की विश्वविख्यात पतित पावनी मां गंगा की भव्य आरती के दर्शन किए एवं मां गंगा की आरती की।

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 18 मई से 24 मई 2018 तक भारत माता मंदिर, विद्यापीठ रोड, कैंट, वाराणसी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर महाराज श्री ने श्री कृष्ण- रूक्मिणी विवाह का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

भागवत षष्ठम दिवस की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। कथा शुरू होने से पूर्व आज विश्व शांति मिशन की ओर से सिंगरा में फार्म में करने वाले संजय कुमार सिंह जिनकी किसी कारणवश नौकरी चली गई है, उनकी दो बेटियां जो पढ़ने में बहुत अच्छी है लेकिन पैसे की तंगी की वजह से फीस के पैसे नहीं जूटा पा रहे थे, तो उनकी दो बेटियां की स्कूली शिक्षा में रूकावट ना हो इसके लिए मिशन की ओर से सकारात्मक कदम उठाते हुए, दोनों बेटियों को पूरे एक साल के पढ़ाई के खर्चे की राशि प्रदान की गई ताकि वो अपने उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकें । पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा कि जब अपनी पूजा कराने का शौक चढ़ जाए और पूजा ना हो तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। हम हमेशा कहते हैं किसी जीव की पूजा मत करो जीव के चरित्र की पूजा करो। गुरू वो नहीं है जो अपने आप को पूजवाने की बात करता हो बल्कि गुरू वो है जो भगवान की शरणागति प्राप्त करवाता हो। भगवान भजन और सतकर्मों से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि वैसे तो हम गुरू से बहुत उम्मीद रखते हैं लेकिन गुरू के बताए हुए मार्ग ...

भगवान शिव की नगरी काशी में पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 18 मई से 24 मई 2018 तक भारत माता मंदिर, विद्यापीठ रोड, कैंट, वाराणसी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर महाराज श्री ने पुतना उद्धार एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

भागवत कथा के पांचवे दिन की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई। कथा प्रारम्भ से पूर्व आज पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज को काशी विद्वत परिषद द्वारा “सनातन धर्म संरक्षक” की उपाधी से सम्मानित किया गया। इस उपाधी को प्रदान करने के लिए काशी विद्वत परिषद के महामहोपाध्याय प्रो० रामयत्न शुक्ल जी, महामंत्री पूर्व कुलपति संपूर्णानंद विश्वविद्यालय प्रोफेसर शिव जी उपाध्याय, प्रवक्ता प्रो० दिनेश कुमार गर्ग, मंत्री प्रो० राम नारायण द्विवेदी, डॉ०ब्रज भूषण ओझा, पश्चिमी भारत के प्रभारी कार्ष्णि नागेंद्र महाराज, आचार्य राकेश महाराज पराशर, आचार्य दीपक मालवीय, प्रोफेसर हरप्रसाद दीक्षित एवx अन्य विद्वत समाज के सम्मानित व्यक्ति उपस्थित थे। देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा कि शुरूआत करते हुए कहा कि जब प्रभु की कृपा जीव पर होती है तब उन्हे श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है और जब अवरणीय सतगुणों का जब संग्रह होता है तब जीव श्रीमद्भागवत कथा करवाने के लिए प्रयत्नशील होता है। महाराज जी ने कल के कथा क्रम को याद दिलाते हुए कहा कि भगवान प्रकट क्यों होते ...

आज पूज्य महाराज श्री को काशी विद्वत परिषद द्वारा “सनातन धर्म संरक्षक” की उपाधी से सम्मानित किया गया।

आज पूज्य महाराज श्री को काशी विद्वत परिषद द्वारा “सनातन धर्म संरक्षक” की उपाधी से सम्मानित किया गया। इस उपाधी को प्रदान करने के लिए काशी विद्वत परिषद के महामहोपाध्याय प्रो० रामयत्न शुक्ल जी, महामंत्री पूर्व कुलपति संपूर्णानंद विश्वविद्यालय प्रोफेसर शिव जी उपाध्याय, प्रवक्ता प्रो० दिनेश कुमार गर्ग, मंत्री प्रो० राम नारायण द्विवेदी, डॉ०ब्रज भूषण ओझा, पश्चिमी भारत के प्रभारी कार्ष्णि नागेंद्र महाराज, आचार्य राकेश महाराज पराशर, आचार्य दीपक मालवीय, प्रोफेसर हरप्रसाद दीक्षित एवं अन्य विद्वत समाज के सम्मानित व्यक्ति उपस्थित थे।